साहब खुद तो पहुंचते नहीं, जो पेट की आग बुझा रहे थे उन्हें भी कर दिया मना, एसडीएम ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को भोजन पहुंचाने से रोका | New India Times

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

साहब खुद तो पहुंचते नहीं, जो पेट की आग बुझा रहे थे उन्हें भी कर दिया मना, एसडीएम ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को भोजन पहुंचाने से रोका | New India Times

लॉक डाउन के दौरान गरीबों तक पहुंचकर उनके व उनके भूखे परिवार की पेट की आग बुझाने वाले सोशल वर्कर्स व संथानों के पास तहसील प्रशासन ने फोन कराकर भोजन वितरण को बंद किये जाने का तुगलकी आदेश जारी किया है। तहसील प्रशासन के आदेश के बाद सोशल वर्कर्स ने गरीबों के घर तक भोजन पहुंचाने के कार्य को विराम दे दिया। तहसील प्रशासन के इस आदेश को लेकर गरीबों का कहना था कि साहब खुद तो पहुंचते नहीं और जो पेट की आग बुझा रहे थे उन्हें भी मना कर दिया। यह कहां का न्याय है। ईश्वर हो या इंसान, नेता हो या अभिनेता हमेशा से गरीबों के पेट के भूख की आग बुझाने के लिये ही संदेश देते देखा गया है। ईश्वर ने भी गरीबों की मदद करने का सदैव संदेश दिया है। लॉक डाउन के दौरान गरीब तबके के लोग व उनका परिवार इन दिनों दो वक्त की रोटी के लिये परेशान हैं ऐसे में उनके पेट की आग बुझाने के लिये शहर के दर्जनों सोशल वर्कर्स व संस्थान के सदस्य आपसी सहयोग से भोजन की लगातार व्यवस्था कर जरुरतमंदों के घरों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे थे लेकिन सोमवार को नर सेवा के रुप में नारायण सेवा कर रहे लोगों के पास गरीबों तक पहुंचाये जा रहे भोजन वितरण के कार्य को बंद करने के लिये प्रशासन की ओर से फोन आने शुरु हो गये। प्रशासन के फोनों के बाद लोगों ने सेवा के कार्य पर विराम लगा दिया।

क्या कहतीं हैं एस.डी.एम पूजा यादव

सोशल वर्कर्स व संस्थानों के द्वारा लॉक डाउन में गरीबों तक पका भोजन पहुंचा रहे लोगों से वितरित कार्य को रोकने के आदेश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को राशन आदि देना हो तो वह तहसील आकर देकर सकता है। तहसील में लगातार प्रशासन के द्वारा भोजन बनवाया जा रहा है इसके अलावा गुरुद्वारे में भी लंगर चल रहा है।

धिन्ना जैसे कितने वृद्ध, बच्चों व ग्रामीणों के पेट की आग बुझा रहे थे सोशल वर्कर्स

साहब खुद तो पहुंचते नहीं, जो पेट की आग बुझा रहे थे उन्हें भी कर दिया मना, एसडीएम ने सामाजिक कार्यकर्ताओं को भोजन पहुंचाने से रोका | New India Times

शहर के मोहल्ला रंगरेजान दो निवासी धिन्ना जो कि करीब 74 वर्ष के हैं, धिना के घर में दो बेटे हैं जिसमें एक बीमार है और दूसरा पहले लेवरी कर घर की दाल रोटी चलाता था। खुद धिन्ना मंडी में पड़ी सब्जी से अपना गुजारा करते थे। लॉक डाउन के दौरान धिन्ना खुद दो वक्त कर रोटी के लिये मोहताज हो गये। वृद्ध धिन्ना पर सबसे पहले सोशल वर्कर शिशिर शुक्ला की नजर पड़ी और वह उनके घर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि दो दिन से वृद्ध बिना दूध की चाय पीकर पेट की आग बुझा रहा था। तुरंत शिशिर ने अपने साथियों के सहयोग से उन्हें कुछ राशन उपलब्ध कराया। इसके बाद मनोज सभासद व बलराम गुप्ता की अगुवाई में चलाई जा रही कांग्रेस की सांझी रसोई से उनके घर रोजाना दो वक्त का पका भोजन पहुंचे लगा जिससे धिन्ना की परेशानी काफी हद तक दूर हो गई लेकिन अब तहसील प्रशासन द्वारा पके भोजन पर रोक लगाये जाने के बाद धिन्ना काफी परेशान हो उठे हैं।

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