जुनैद शेख़, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

जूना धुलिया स्थित शाही (खूनी) मस्जिद के 390 सालों के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के चलते शुक्रवार को जुमे की नमाज नहीं हुई। इमाम ए जुमा हाफिज सलाम ने प्रशासन के विनम्र निवेदन पर नमाजियों की सुरक्षा के चलते नमाजे जुमा शुक्रवार 14 अप्रैल तक सार्वजनिक रूप से अदा करना स्थागित कर दी है।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने सभी भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों समेत मंदिरों को बंद कर दिया है।

हर शुक्रवार को पुराने धुलिया की मुगल काल की शाही मस्जिद और देवपुर इस्लाम पुरा की जामा मस्जिद जो 1827 में निर्माण की गई इन दोनों मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा की जाती है। इसमें बड़ी संख्या में नमाजी आते हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए धुलिया की सभी मस्जिदों में होने वाली जुमे की नमाज को स्थागित कर दिया है। धुलिया के इतिहास में पहली बार 390 सालों में सार्वजनिक रूप से जुमा की नमाज अदा नही की गई है।
मुफ़्ती कासिम जिलानी ने बताया कि वरिष्ठ धर्मगुरुओं समेत डॉक्टरों ने भीड़ से दूर रहने की अपील की है। मौलाना ने कहा कि हमें सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए। मौलवी गंज स्थित मरकज़ मस्जिद में भी जुमे की नमाज स्थगित रही। मस्जिद के प्रवेश द्वार पर ताला लटका हुआ था और लोगों को सड़क से खदेड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में नगर के विभन्न इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया था।
शहर में यहां होती है जुमा नमाजें
शुक्रवार को शहर की अनेकों मस्जिदों में बड़ी नमाजें जुमा होती हैं इसमें हजारों की संख्या में लोग जमा होते हैं। इनमें जामा मस्जिद देवपुर, काजी बाड़ा, आंजन शाह दरगाह, मौलवीगंज मरकज़ मस्जिद शामिल है। जमीयत उलेमा के मौलाना जियाउर्रहमान पहले ही लोगों से बड़ी मस्जिदों के बजाए अपने घरों में नमाज अदा करने की अपील कर चुके हैं साथ ही उन्होंने ही बाजारों में बच्चों को न ले जाने और बिना कारण घरों से नहीं निकलने की हिदायत भी लोगों को दी हैं।
