जंगल से निकले बाघ आवारा घूम रही गायों को बना रहे हैं अपना निवाला | New India Times

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

जंगल से निकले बाघ आवारा घूम रही गायों को बना रहे हैं अपना निवाला | New India Times

महेशपुर रेंज के गांवों में बाघ ने आवारा घूम रही दो गायों को अपना निवाला बना दिया। मौके पर वनकर्मियों के न पहुंचने पर लोगों में आक्रोश फैल गया है। डायल-100 की गाड़ी मौके पर पहुंच कर ग्रामीणों को शान्त कर घटना स्थल से हटाया गया।

ज्ञात हो कि महेशपुर रेंज के गांवों में बाघ आए दिन आवारा पशुओं को अपने निवाला बना रहे हैं। वहीं वन कर्मियों की तरफ से सतर्कता बरती जा रही है और बाघ मित्र पल-पल की लोकेशन मुहैया करा रहे हैं जिसके चलते आज आंवला बीट के गांव बाकरगंज में गांव के दक्खिन, हरिश्चंद्र एवं छोटेलाल पुत्र कन्हैया लाल के खेत में ग्रामीणों ने गन्ने की छिलाई करते समय एक बाघिन के संग दो बच्चों को लेकर विचरण करते देखा तो ग्रामीणों के होश उड़ गए। वह फौरन ही गांव की तरफ भाग कर आए और वन विभाग के कर्मचारियों को सूचना दी तब तक बाघिन के दो बच्चों सहित एक आवारा विचरण कर रही गाय को अपना निवाला बना दिया और उसको काफी लंबा खींच कर गन्ने के खेत में खा रही थी। तब तक ग्रामीणों ने कांता, लाठी, बल्लम सहित दर्जनों की संख्या में समुदाय बनाकर खेत की ओर पहुंचे और गाय का आधा अधूरा खाया हुआ शव देख कर आक्रोशित हो गए और वहां पर वन विभाग के कोई भी सक्षम अधिकारी न पहुंचने पर वन विभाग के खिलाफ हो हल्ला करने लगे। मौके पर पहुंचकर आंवला बीट के बाचर एवं डायल 100 के सिपाही उमेश गौतम एवं सौर्यबेद्र सिंह ने उनको शांत किया और वहां से उन लोगों को सचेत किया कि वह लोग हैं ना जाएं जिसके चलते ग्रामीण शांत हुए। उधर आंवला बीट के वन बीट अधिकारी मतीन अहमद ने बताया कि वह महेशपुर रेंज में गस्त कर रहे हैं। वहीं दूसरी घटना बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में गश्त कर रहे फॉरेस्टर रामप्रसाद नेता एवं मतीन अहमद ने बताया कि वह टीकापुर, परेली, कैमरा, नरसिंहपुर, हरगोविंदपुर गश्त कर रहे थे तभी उन्हें छोटे सिंह बाघ मित्र के द्वारा सूचना मिली कि हर गोविंदपुर में बाघ ने एक गाय को निवाला बना दिया है, फौरन ही मौके पर पहुंचकर वन विभाग की टीम ने अधखये शव को गड्ढे में दफन करवा दिया है। वहीं लोगों को सचेत किया जा रहा है कि वह जंगल की तरफ ना जाएं और खेतों की तरफ भी अकेले ना जाएं एवं लाठी, डंडा, कुदाल, तेज आवाज वाली वस्तुएं, ढोला व हल्ला लगाते हुए जाएं जिससे बाघ से बचाव किया जा सकता है। वहीं फारेस्टर रामप्रसाद ने बताया कि वन रेेंजर मोबिन आरिफ एवं डीएफओ लखीमपुर केे आदेशानुसार बाघ प्रभाावि क्षेत्रों में तीन टीमें गठित कर बाघ की निगरानी रखने के लिए आठ 8 घंटे की गश्त लगा दी गई है ताकि बाघ प्रभावित क्षेत्रों में लोग अपने को सुरक्षित महसूस कर सकें।

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