अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

जाने-माने कहानीकार और उपन्यासकार अवधेश प्रीत ने कहा कि लघुकथा की रचना प्रक्रिया एक रचनात्मक अनुभूति की ऐसी प्रक्रिया है जो आनंद और पीड़ादायक भी है।
वे आज कालिदास संग्रहालय स्थित अनसूईया सभागार में अखिल भारतीय प्रगतिशील लोककथा मंच के तत्वावधान में आयोजित लघुकथा कलश (संपादक योगराज प्रभाकर) के रचना प्रक्रिया महाविशेषांक के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लघुकथा के लिए बिहार में पिछले 50 वर्षों से लगातार कार्य हो रहे हैं।
साहित्यकार डॉ संतोष दीक्षित ने कहा कि रचना कहीं से भी किसी भी क्षण किसी के लिए मार्गदर्शक के रूप में आ सकती है। अनुभव इसके लिए जरूरी शर्त नहीं है।
आकाशवाणी पटना के पूर्व निदेशक डॉ किशोर सिन्हा ने कहा कि लघुकथा को अभी लंबा सफर तय करना है । और इसके लिए लघुकथाकारों को निरंतर उत्कृष्ट रचनाएं देने की आवश्यकता है।
लघुकथा मंच के महासचिव डॉ ध्रुव कुमार ने कहा कि रचना प्रक्रिया के जरिए किसी भी रचना को बेहतर और बेहतर बनाया जा सकता है यह कई चरणों में पूर्ण होती है। उन्होंने संपादक योगराज प्रभाकर को बधाई देते हुए कहा कि लगभग 400 पेज की इस पत्रिका में उन्होंने देशभर के 126 लघुकथाकारों को स्थान दिया है।
इसके अतिरिक्त नेपाली भाषा के 8 रचनाकारों की लघुकथाएं भी प्रकाशित हुई हैं।
जेपी विश्वविद्यालय छपरा की प्रोफेसर डॉ अनीता राकेश ने कहा कि लगातार लेखन से भी रचनाकारों की रचना में निखार आता है और यह सब रचना प्रक्रिया को समझने और देखने का अवसर होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय प्रगतिशील लघु कथा मंच के अध्यक्ष सतीश राज पुष्करणा ने की।
कार्यक्रम में सिद्धेश्वर, पुष्पा जमुआर, मृणाल आशुतोष, विभा रानी श्रीवास्तव, विरेंद्र कुमार भारद्वाज, डॉ ध्रुव कुमार और कल्पना भट्ट ने अपनी- अपनी लघु कथा का पाठ किया।
कार्यक्रम में डॉ पूनम देवा अभिलाष दत्त, अनिल रश्मि, आलोक चोपड़ा, संगीता, मधुरेश नारायण, रवि उपाध्याय, प्रेमलता सिंह, मधु सिन्हा, प्रियंका श्रीवास्तव, रंजना सिंह, रिचा वर्मा, मधु दिव्या अभिलाषा कुमारी, श्रुति अग्रवाल और ए आर हाशमी ने भी शिरकत की।
