नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

33 करोड पौधारोपण समेत पर्यावरण से जुडे कई योजनाओं पर अदभुत तरीके से फ़ायलिंग वर्क करने वाली सरकार की ओर से जहा इसी थ्योरी पर काम चलाया जा रहा है वहीं राज्य में ऐसे हजारों सेवाभावी संस्थाएं हैं जिनके द्वारा बगैर किसी थियरी या लोकप्रियता बटोरने की मंन्शा के जलवायु परिवर्तन के खतरे को लेकर पूरी ईमानदारी के साथ पौधारोपण का काम किया जा रहा है। इसी NGO में एलजीबीटीक्यू ( LGBTQ ) समुदाय के लिए काम करने वाली एक संस्था का नाम है निरभ्र निर्भय फ़ाऊँडेशन, मान्सून के समय फाउंडेशन के सेवाभावी सदस्यों ने मिलकर भुसावल के रिहायशी इलाकों मे बड़ी मात्रा में नीम, पिपल, बरगत, गुलर के पौधे रोपे है।

इस काम मे संस्था उपाध्यक्ष प्रमिला महाजन, लालचंद महाजन जीवन महाजन समेत संस्था कि संस्थापक डा मनिषा महाजन ने हिस्सा लिया ! LGBTQ समुदाय के लिए काम कर रहि डा मनिषा पौधारोपण अभियान को वसुंधरा बचाव से जोडकर देखती है और कहती है कि जलवायु परीवर्तन जैसी समस्या से हमारा शिक्षीत वर्ग परीचीत है ! हमे गांवो गांवो मे हमारे ग्रामीण लोगो को इस विषय पर सरल भाषा मे जनजागृती करना होगी जिससे जल – जंगल मे बिगडा संतुलन पाटा जा सकेगा और सुखे जैसी विभिषिका वाली स्थिती से हमे जुझना नहि पडेगा ! महाराष्ट्र के पश्चीमी और कोंकण मे वर्षा माकुल है लेकिन विदर्भ , मराठवाडा तथा उत्तर महाराष्ट्र के कुल मिलाकर 20 जिलो मे अब तक औसत बारीश भी नहि हो सकि है ! जलवायु परीवर्तन को लेकर जैसे कि सरकारी प्रयासो को करोडो रुपया खर्च करने के बावजुद भी लालफीताशाहि से गुजरना पडता है ऐसे मे निरभ्र के सदस्यो द्वारा रोंपे गए पौधो को संवर्धन हेतु प्राप्त निर्भय संकल्पना कि सराहना कर उसे राजाशिष देना उचीत होगा ऐसी भावना पर्यावरण प्रेमियों में व्यक्त की जा रही है।
