सभी पाप क्रियाओं का त्याग ही दीक्षा है: पूज्य श्री धर्मेन्द्र मुनिजी | New India Times

रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

सभी पाप क्रियाओं का त्याग ही दीक्षा है: पूज्य श्री धर्मेन्द्र मुनिजी | New India Times

स्वयं से स्वयं को जानने की प्रतीति होना चाहिये, हमें यह भी विश्वास होना चाहिये कि ज्ञानीजन हमारे विषय में सभी जानते हैं, यह प्रतीति ही ज्ञानवान बनने की प्रक्रिया है। जीव का स्वरूप समझना उसे जानने का प्रयास ही जीव को पाप भीरू बनाता है। उक्त प्रवचन जैनाचार्य जिन शासन गौरव पूज्य श्री उमेशमुनिजी के अंतेवासी शिष्य तत्वज्ञ पूज्य श्रीधर्मेन्द्रमुनिजी ने विशाल धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहे। पूज्यश्री ने कहा कि स्वयं से जीव के स्वरूप की पहचान से लोकवादी, लोकवादी से कर्मवादी, और कर्मवादी से क्रियावादी होने का पता चलता है। उन्होंने कहा कि इन्द्रिय कषाय आदि विषयों से अरुचि ही वैराग्य है और समस्त पाप क्रियाओं का त्याग दीक्षा है। धर्मसभा को मधुर व्याख्यानी पूज्य श्रीसंदीपमुनिजी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार मे जीव को मनुष्यभव, सन्त समागम, श्रद्धा व उसका अनुसरण करते हुए संयम में पराक्रम ये चार अंग की प्राप्ति परम् दुर्लभ है। जीव पुण्योदय से हमिंद्र देव बनकर स्वर्ग का विपुल सुख भोग करता है तो पापोदय से नरक तिर्यंच की हीनता को भी प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि जीव जबतक कर्मयुक्त है वह लोक में कही भी बच नही सकता जबकि कर्म मुक्त होकर वह शास्वत सुख को प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि मोहनीय कर्म के क्षयोपशम से जीव संयम को धारण करता है और मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। महासती प्रशमप्रभाजी ने लाग्यो बाजार महावीरा नाम रो के माध्यम से शासन की विशेषता बताई। इस अवसर पर विभिन्न तप आराधकों ने तपस्या के प्रत्याख्यान ग्रहण किये वही संचालन कर रहे संघ के मंत्री प्रदीप गादिया ने बताया कि आज की चौवीसी मनीष कुमार मनोज कुमार जैन परिवार व मयूर कुमार वर्धमानजी तलेरा परिवार द्वारा रखी गई है। धर्मसभा में मुमुक्षु मयंक पावेचा, उनके परिजन सहित अनेक स्थानों के भक्तजनों ने उपस्थित होकर जिनवाणी श्रवण का लाभ लिया।

महासती मुक्तिप्रभाजी आदि ठाणा – 6 का मंगल प्रवेश

अक्षय तृतीया पारणा एवं दीक्षा महोत्सव में अपना सानिध्य प्रदान करने सन्त – सतियों का मंगल प्रवेश जारी है। इसी तारतम्य में आज करीब 11 किमी से ज्यादा का उग्र विहार करते हुए पेटलावद रोड़ से विदुषी महासती पूज्या श्रीमुक्तिप्रभाजी आदि ठाणा – 6 का मंगल प्रवेश हुआ। उनकी अगवानी में श्रीसंघ के सदस्यगण महासती निखिलशिलाजी के सानिध्य में पहुँचे।

अक्षय तृतीया पारणा व दीक्षा महोत्सव में कार्य का हुआ विभाजन

सभी पाप क्रियाओं का त्याग ही दीक्षा है: पूज्य श्री धर्मेन्द्र मुनिजी | New India Times

आगामी 7 मई को सम्पन्न होने जा रही दीक्षा एवं लगभग 200 वर्षीतप आराधकों के पारणें को लेकर स्थानीय अणु पब्लिक स्कूल पर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रीसंघ अध्यक्ष ने समारोह के सम्बंध में विस्तार से बताया साथ ही बढ़ती गर्मी को देखकर नगर में आने वाले सन्त -सतियों की वैयावच्च व श्रद्धालुओं तपस्वियों के अनुकूलता के अनुसार कार्य का विभाजन भी किया। आयोजन में श्रीसंघ ने उपस्थित सदस्यों से चर्चा कर आवास समिति, भोजन समिति, पारणा समिति, दीक्षा समिति, सम्मान बहुमान समिति, लॉकर समिति, पार्किग समिति आदि का गठन करते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य का विभाजन किया। अंत मे सकल संघ एवं नवयुवक मंडल को किट प्रदान की गई।

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