निजी स्कूल की प्रताड़ना से आहत अभिभावक ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर लगाई न्याय की गुहार | New India Times

फराज़ अंसारी, ब्यूरो चीफ, बहराइच (यूपी), NIT:

निजी स्कूल की प्रताड़ना से आहत अभिभावक ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर लगाई न्याय की गुहार | New India Times

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिला में शिक्षा का केन्द्र अब व्यवसायिक केन्द्र बनता जा रहा है, जिसपर अंकुश लगाने में न तो प्रशासन कोई अहम पहल कर रहा है और न ही कोई जनप्रतिनिधी ही इस आमजन से जुड़े मुद्दे पर अपना ध्यान केन्द्रित कर कोई प्रभावी कदम उठाना उचित समझ रहा है। आलम यह है कि अभिभावकों को अपने नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य के लिये निजी स्कूलों में पढ़ाने की चाह में स्कूल संचालकों की मनमानी के कारण लुटने को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसा इसलिये है कि निजी स्कूल नियमों और मानकों को तार-तार कर मनचाही फीस वसूल रहे हैं जिसका बोझ सीधे-सीधे अभिभावकों की जेबों पर पड़ रहा है और मामला सिर्फ फीस तक ही सीमित हो तब भी ठीक है लेकिन निजी स्कूलों ने कमीशनखोरी के चक्कर में अपने स्कूल में चलने वाली यूनीफॉर्मस, किताब कापियों के साथ साथ जूतों तक की दूकानें निर्धारित कर रखी हैं। जहां अभिभावकों से मनचाहा दाम वसूल किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सब बेसिक शिक्षा गृह राज्य मंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र में ही हो रहा है और शिक्षा विभाग इस पर मौन धारण किये हुए है।

निजी स्कूल की प्रताड़ना से आहत अभिभावक ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर लगाई न्याय की गुहार | New India Times

बीते दिन शहर के बहराइच के मोहल्ला नाजीरपुरा निवासी अखिलेश कुमार गुप्ता पुत्र स्व0 राधेश्याम गुप्ता ने मुख्यशिक्षा सचिव उत्तर प्रदेश सरकार सहित बेसिक शिक्षा अधिकारी बहराइच को एक लिखित शिकायती पत्र दे कर मीराखेलपुरा क्षेत्र अन्तर्गत संचालित डीवीनिटी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य पर मनमानी फीस वसूलने के साथ साथ स्कूल की ड्रेस और कॉपी किताब भी स्कूल प्रशासन द्वारा निर्धारित की गयी दूकान से खरीदने के लिये बाध्य किये जाने का गम्भीर आरोप लगाया है।

ज्ञात हो कि निजी स्कूलों में पढ़ाई को एक व्यसाय के रूप में तब्दील कर दिया गया है। जिसका सीधा असर अभिभावकों पर पड़ रहा है, जो स्कूलों को विद्या का मंदिर मानते हैं। रि एडमिशन से लेकर पाठ्य सामग्री में सरेआम शिक्षा विभाग के नियमों की अवहेलना की जा रही है। स्थिति को जानते हुए समझते हुए विभागीय अधिकारी मौन धारण किये हुए हैं। जिससे निजी स्कूल संचालकों की मनमानी बढ़ती जा रही है। कुछ निजी स्कूल मोटी फीस ही में नहीं बल्कि कमीशनघोरी में भी पीछे नहीं है। आलम यह है कि स्कूलों में परीक्षा परिणाम घोषित होने के समय ही अभिभावकों को रिपोर्ट कार्ड के साथ सम्बन्धित दुकानदार का कार्ड थमा जा रहा है। कारण स्पष्ट है कि निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के चलाने से प्राइवेट स्कूलों को मोटा कमीशन मिलता है। महंगी किताबों का बोझ अभिभावकों पर ही पड़ता है। लिहाजा पहले एडमिशन फीस, फिर मनमानी पुस्तकों बिल्डिंग फंड के नाम पर अभिभावकों को लूटा जा रहा है। इसके अतिरिक्त काफी स्कूलों ने पुस्तक बिक्री स्टोर निर्धारित करने के साथ-साथ अब टाई-बेल्ट और पहचान पत्र के नाम पर भी मोटी कमाई का धंधा शुरू किया गया है। स्कूलों में मिलने वाले टाई-बेल्ट की कीमत को लेकर भी अभिभावक कोई बहस नहीं कर सकते। जो दर स्कूल प्रशासन मागता है, उसका भुगतान अभिभावकों को करना ही पड़ता है। यही स्थिति पहचान पत्र की एवज में की जा रही वसूली में भी है। स्कूलों में पहचान पत्र के एवज में अभिभावकों से 100 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। बीते दिन शहर के बहराइच के मोहल्ला नाजीरपुरा निवासी अखिलेश कुमार गुप्ता पुत्र स्व0 राधेश्याम गुप्ता ने मुख्यशिक्षा सचिव उत्तर प्रदेश सरकार सहित बेसिक शिक्षा अधिकारी बहराइच को एक लिखित शिकायती पत्र दे कर मीराखेलपुरा क्षेत्र अन्तर्गत संचालित डीवीनिटी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य पर मनमानी फीस वसूलने के साथ साथ स्कूल की ड्रेस और कॉपी किताब भी स्कूल प्रशासन द्वारा निर्धारित की गयी दूकान से खरीदने के लिये बाध्य किये जाने का गम्भीर आरोप लगाया है। अखिलेश का आरोप है कि उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला नर्सरी कक्षा में कराया है लेकिन अब उनसे न सिर्फ बढ़ी फीस वसूल की जा रही है साथ ही स्कूल का यूनिफॉर्म और किताब कापियों के स्कूल द्वारा तय की गयी दूकान से खरीदने का दबाव बनाया जा था है जहां उनसे मोटी रकम वसूल की जा फ्ही है। पीड़ित ने मुख्यशिक्षा सचिव सहित बीएसए को लिखित शिकायती पत्र भेज कार्यवाही की मांग की है अब देखना यह है कि प्रशासन मनचाही फीस व कमीशनखोरी के चक्कर मे निर्धारित दूकानों से यूनीफॉर्म व किताब कॉपी खरीदने के लिये अभिभावकों को जबरन बाध्य कर रहे इन निजी स्कूलों के विरुद्ध क्या प्रभावी कदम उठाता है।

By nit

One thought on “निजी स्कूल की प्रताड़ना से आहत अभिभावक ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर लगाई न्याय की गुहार”

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.