मुमताज़ महल फैस्टिवल की अर्ध शताब्दी के तीन दिवसीय कार्यक्रम को यादगार एवं ऐतिहासिक बनाने के जुनून में लगे हैं शहज़ादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी | New India Times

मेहलक़ा अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

मुमताज़ महल फैस्टिवल की अर्ध शताब्दी के तीन दिवसीय कार्यक्रम को यादगार एवं ऐतिहासिक बनाने के जुनून में लगे हैं शहज़ादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी | New India Times

मुमताज़ फैस्टिवल के चेयरमैन शहज़ादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी बेगम मुमताज की मोहब्बत में गिरफ़्तार होकर विगत 49 साल से एक मिशन के तहत जूनूनी कैफ़ियत के साथ प्रति वर्ष की परंपरा अनुसार 7 जून को मुमताज़ का जश्न मनाकर इस तारीखी विरासत को ज़िंदा रखे हुए हैं। अपनी पूरानी परंपरा अनुसार मुमताज़ बेगम की अस्थाई आराम गाह पर क़ुरान खानी के अलावा सेमिनार, मुशायरे सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का एक दिवसीय आयोजन कराना और उसमें राष्ट्रीय स्तर के अतिथियों, फ़िल्म कलाकारों सहित साहित्य की प्रमुख हस्तियों को आमंत्रित करना उनकी व्यवस्थाओं का संचालन करना एक बड़ा काम है। इस 49 वर्षीय आयोजन से भारतीय संस्कृति की रक्षा के साथ पर्यटन को बढ़ावा देना भी शहज़ादा आसिफ खान गौरी के मिशन में शामिल है। 50 वर्षीय कार्यक्रम के संबंध में शहज़ादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी ने बताया कि इस वर्ष का कार्यक्रम तीन दिवसीय होगा। कार्यक्रम के पहले दिन दो स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।पहला स्वास्थ्य शिविर गर्भवती महिलाओं को समर्पित होगा। इस शिविर में गर्भवती महिलाओं की जांच और जीवन रक्षक मार्गदर्शन के साथ निःशुल्क दवाइयां भी दी जाऐंगी। इस शिविर का उद्देश्य यह है कि, प्रसव पीड़ा के दौरान ही मुमताज़ की मृत्यु हुई थी। 50 वर्षीय कार्यक्रम के माध्यम से मुमताज़ को श्रध्दांजलि अर्पित की जाऐगी। इसी के आंखों के बड़े आप्रेशन का कैंप भी प्रथम दिवस आयोजित होगा। इस कैंप के माध्यम से आंखों के मरीज़ों को रोश़नी देने का प्रयास किया गया है। दूसरे दिन 50 जोड़ों के इज्तिमाई निकाह का आयोजन किया गया है, जिसमें दुल्हनों को अन्य सामग्री और गिफ्ट के साथ मुमताज़ बेगम जैसा ताज पहनती थी, उसी शक्ल और रंगरूप जैसा ताज दुल्हनों को भेंट किया जाऐगा। कार्यक्रम के अंतिम और तीसरे दिन मुख्य आयोजन में ज़ैनाबाद में कुरआन खानी का ऐहतेमाम, राजा की छत्री पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा, सेमिनार मुशायरा आदि सब कुछ जनता की भावना के अनुरूप होगा। शहज़ादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी के अनुसार कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा और सदियों तक याद किया जाएगा।

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