सरवर खान ज़रीवाला, भोपाल, NIT;
मध्य प्रदेश के सागर में नजूल की करोड़ों की जमीन के खरीद फरोख्त की विधानसभा सदन में सुनाई दी। कागजों की हेराफेरी कर सरकारी जमीन को सुभाग्योदय डेवलेपर्स को बेचने का कांग्रेस विधायक हर्ष यादव ने मुद्दा उठाया। कांग्रेस विधायक हर्ष यादव ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने पंजीयन न करने का आदेश दिया था लेकिन फिर भी सौदा किया गया। उन्होंने जमीन के खरीद व फरोख्त में राजस्व विभाग के सदस्य एम के सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। राजस्व बोर्ड के सदस्य एमके सिंह ने कलेक्टर की आपत्ति को दरकिनार कर जमीन बेचने की इजाजत दे दी। कांग्रेस ने विधायक ने कहा कि प्रदेश में सरकारी जमीन की बंदरबांट का यह एक और बड़ा उदाहरण है। कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने कहा हम रेवेन्यू बोर्ड के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट जा रहे हैं। गोविन्द सिंह ने कहा कि कलेक्टर के आदेश के खिलाफ कैसे रजिस्ट्री की गई? सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विदित हो कि सागर में सागर-खुरई रोड पर भाग्योदय तीर्थ अस्पताल के सामने स्थित करोड़ों की सरकारी जमीन कलेक्टर की आपत्ति के बाद भी सुभाग्योदय डेवलेपर्स को बेच दी गई। राजस्व विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत के चलते सरकार द्वारा खत्री बंधुओं को दी गई करीब 27 एकड़ जमीन का सौदा करवा दिया गया। खत्री बंधुओं ने कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देकर जमीन बेचने का आवेदन दिया था। कलेक्टर ने सरकारी जमीन होने के चलते आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला राजस्व बोर्ड पहुंच गया। रिकार्ड में यह जमीन सरकार के खाते में है इसके बावजूद राजस्व बोर्ड ने सुनवाई में फैसला पट्टेधारक के हक में देकर इसे बेचने की इजाजत दे दी। अब सरकार ने हाईकोर्ट में राजस्व बोर्ड के फैसले के खिलाफ याचिका दायर कर दी है, जिस पर सुनवाई 9 मार्च को होने वाली है।
