बुरहानपुर विधानसभा में नाम वापसी के बाद 10 उम्मीदवार हैं चुनावी दंगल में | New India Times

मेहलक़ा अंसारी, ब्यूरो चीफ बुरहानपुर (मप्र), NIT:

बुरहानपुर विधानसभा में नाम वापसी के बाद 10 उम्मीदवार हैं चुनावी दंगल में | New India Times

बुरहानपुर विधानसभा में नाम वापसी की आखरी तारीख पर अब प्रमुख राजनैतिक दलों एंव निर्दलीय सहित 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। हिंदू महासभा एवं निर्दलीय सहित कुल तीन उम्मीदवार सर्वश्री अनूप यादव एडवोकेट, सुभाष कोली एवं एडवोकेट सोहेल अहमद हाशमी ने अपने नाम वापस ले लिए हैं।

बुरहानपुर विधानसभा सीट के उम्मीदवार

(1) अर्चना चिटनीस (भाजपा) (2) रविन्द्र महाजन (कांग्रेस),

(3) ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा भैया (निर्दलीय)

(4)आशीष शर्मा (शिवसेना) (5) सैयद शौकत अली (लोजपा)

(6) मनोज पवार (बसपा)

(7) शरीफ राजगीर (निर्दलीय)

(8) स्वामी पुष्करानंद जी महाराज (निर्दलीय)

(9) दयाशंकर यादव (निर्दलीय)

(10) विजय गाँजेवाला (निर्दलीय)।

बुरहानपुर विधानसभा में नाम वापसी के बाद 10 उम्मीदवार हैं चुनावी दंगल में | New India Times

इस चुनावी दंगल में त्रिकोणीय मुक़ाबला अर्चना चिटनिस दीदी (भाजपा), रवींद्र महाजन (कांग्रेस) एंव शेरा भैया (आज़ाद) के दरम्यान ही होना माना जा रहा है। वैसे जनता की भावना के अनुसार आमजन मुख्य मुक़ाबला अर्चना चिटनिस दीदी और शेरा भैया के दरम्यान ही माना जा रहा है। शेष उम्मीदवार पार्टी गाईड लाईन के अनुसार प्रजातंत्र में अपनी आस्था दर्शाने और अपनी पार्टी के सियासी वजूद को क़ायम रखने के लिए मैदान में हैं। आज़ाद उम्मीदवार भी सोशल और पालिटिकल लाइफ में अपने आप की जान पहचान स्थापित करने के लिए मैदान में हैं। वहीं एक आज़ाद उम्मीदवार विजय गांजे वाला का स्पष्टीकरण है कि उन्हें 15 हजार वोट मिलने की संभावना तलाश करने और आगामी मेयर चुनाव में अपनी क़िस्मत आज़माने के मक़सद से आज़ाद खड़े हो गए हैं। उनका टारगेट यह इलेक्शन क़तई नही है। शिवसेना के आशीष शर्मा भी 15 सालों से जनता की सेवा में गुज़ारे हैं, जनहित के जो आंदोलन किए हैं उसका लाभ इस इलेक्शन में जनता से आशीर्वाद के रूप में चाहते हैं। शेरा भैया भी कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने से नाराज़ हो कर जनता के आशीर्वाद से आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर क़िस्मत आज़मा रहे हैं क्योंकि वह भी उम्र की मुनासिबत से आखरी स्टेज (पड़ाव) के क़रीब पहुंच रहे हैं और इस बार मौक़ा नहीं मिला तो कभी भी नहीं मिलेगा। अर्चना चिटनिस दीदी सिटिंग एमएलए हैं और 10 सालों के काम की, विकास कार्यों की और जनता के बीच में अपना समय बिताने की लंबी फैहरिस्त है, ऎसे में उनका नाम और काम दोंनों एक नंबर का होने से उन्हों ने अपने समस्त प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ कर टाप पर हैं। कांग्रेस से अजय रघुवंशी का नाम फाइनल होते होते रह जाना और उम्मीदवार बदलने की सर फुटव्वल ने कांग्रेस की छवि पर विपरीत असर डाला है। भाजपा की भीतरघात का लाभ कांग्रेस उम्मीदवार को मिलने की प्रबल संभावना है। अब 28 नवंबर को ज़िले की जनता किस पर मुहर लगा कर अपने सर पर बिठाती है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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