वी.के.त्रिवेदी, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT;
एक तरफ सरकार पालीथीन निषेध के लिए बड़े-बड़े अभियान चला रही है। रोज नगर पंचायत व पुलिस प्रशासन छापेमारी कर रहा है लेकिन उनके दावे हर मुद्दे पर फेल हो रहे हैं। पॉलिथीन निषेध के नाम पर लाखों रुपए के विज्ञापन नगर पंचायत द्वारा छपवाए जा चुके हैं जो कि बेकार साबित हो रहे हैं। पुलिस के जवान सड़क पर डंडा पटकते हुए दुकानों में पॉलिथीन चेक करते हैं लेकिन पॉलिथीन लखीमपुर खीरी जिले में बंद होने का नाम नहीं ले रही है, खुलेआम चौराहे पर फल विक्रेता, सब्जी विक्रेता, किराना स्टोर प्रशासन की नाक के नीचे पॉलिथीन में सामान दे रहे हैं। मेन रोड पर मिठाई वाला, फल वाला आदि इन दुकानों पर खुलेआम पॉलिथीन में सामान दिया जा रहा है तो कैसे बंद होगी पालीथीन जब यह दुकानदार प्रशासन का ही नियंत्रण नहीं मानते हैं क्योंकि शासन प्रशासन द्वारा अब तक इन पर कोई कठोर कदम उठाया ही नहीं गया केवल सरकार के इस अभियान को झूठ-मूठ चलाने के नाम पर छापेमारी करके इति श्री कर ली जाती है। अगर सरकार की सही मंशा हो तो पॉलिथीन बनाने वाली फैक्ट्रियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। जब पालीथीन बनेगी ही नहीं तो दिखेगी कैसे? जब बिकेगी नहीं तब उसमें सामान कैसे दिया जाएगा? पिछली सरकार में भी पालीथीन बंद करने का नाटक किया गया था जो पूरी तरह फेल रहा और कचरा नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की गई थी वह भी मिशन पूरी तरह ठप रहा। पिछली सरकार की तरह ही उसी ढर्रे पर यह नई सरकार भी चल रही है। इस सरकार में भी पॉलिथीन निषेध योजना सरकार की पूर्णता विफल और फेल है, इसकी वजह से आज भी निरीह जानवर खाकर अपनी जान दे रहे हैं, वही इन्हीं पालीथीनों की वजह से नगर के नाले चोक होते हैं जिनको देखने वाला कोई नहीं है। अभी हुई भीषण बरसात में नाली- नालों की दिशा और दशा पूरे नगर वासियों को देखने को मिली, इसलिए पॉलीथिन मुक्त होना नितांत आवश्यक है जिसके लिए शासन प्रशासन को कठोर कदम उठाए जाने चाहिए जिससे दुकानदार और ग्राहक दोनों में भय पैदा हो और वह न पॉलिथीन में सामान दे सकें और ग्राहक न पॉलिथीन में सामान ले सके,सामान देने और लेने वालों लोगों पर भी कठोर कार्यवाही हो तभी कुछ हद तक प्रतिबंध लग सकता है। पालीथीन नगर पंचायत प्रशासन और पुलिस प्रशासन अगर चाहे तो कठोर नियंत्रण करके रुकवा सकता है लेकिन यह केवल योजना बनाते हैं उन को धरातल पर अमलीजामा पहना देते हैं। पॉलिथीन निषेध योजना पुलिस के लिए अवैध धन उगाही का जरिया भी बन चुकी है। लगता है ठेले वालों से हफ्ता लेकर पालीथीन में सामान पुलिस प्रशासन व नगर पालिका ही बिकवा रही है।
