रहीम हिंदुस्तानी, झाबुआ (मप्र), NIT;
झाबुआ जिले के मेघनगर में लाखों रुपए की लागत से बनी सरकारी अस्पताल की आलीशान बिल्डिंग मात्र देखने के उपयोग में ही आ रही इसमें व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है। इतनी बड़ी बिल्डिंग में मरीजों के लिए कोई सुविधा नहीं है जिससे रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर जरा सा भी गंभीर मरीज आता है तो उसे फौरन जिला अस्पताल झाबुआ या फिर दाहोद या कहीं और रेफर कर दिया जाता है। यही आलम यहां मौजूद डॉक्टरों का भी है। इस बड़े अस्पताल में कोई भी किसी बीमारी का विशेष डॉक्टर यहां नहीं है। महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने से महिला रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां महिला चिकित्सक न होने पर महिला प्रसूति के प्रकरण नर्सों के सहारे ही निपटाएं जा रहे हैं। मेघनगर एवं आस-पास के गांवों के महिलाओं की प्रसूति में भी काफी परेशानियां आती हैं।गंभीर प्रकरणों में बाहर शहर के निजी चिकित्सालयों में जाना पड़ता है लेकिन वहां का खर्च गरीब ग्रामीण वहन नहीं कर पा रहा है।
इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा अनेकों बार विधायक, सांसद, स्थानीय नेता और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन आज तक समस्या यथावत है। यहां बच्चों का भी कोई चिकित्सक मौजूद नहीं है ना ही कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ है, यहां सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है। नगर एवं विकास खंड से जुड़े सैकड़ों गांवों के मरीजों को भी उपचार हेतु यहां लाया जाता है मगर अफसोस यह बहुत कम लोगों को यहां संतोष मिलता है वरना सभी असंतोष रहते हैं। स्थानीय प्रतिनिधि अगर चाहें तो इस नगर को अच्छी से अच्छी व्यवस्था अस्पताल में करवा सकते हैं लेकिन ऐसा ना करते हुए हजारों लोगों के जीवन के साथ खुला मजाक कर रहे हैं।
