सद्दाम हुसैन, बहराइच/लखनऊ, NIT;
इस समय पूरे देश में पत्रकारों को डराने धमकाने, हमला करने व फर्जी मुकदमों में फंसाने का सिलसिला जारी है। अक्सर देखा गया है कि अवैध कारोबारी, भ्रष्ट अधिकारी पुलिस से सांठगांठ कर अवैध कारोबार व भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कर पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिश करते हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच जिला में सामने आया है। यहां जिला अस्पताल में चल रहे अवैध गतिविधियों को उजागर करने वाले बेबाक पत्रकार फराज अंसारी के फर्जी मामला दर्ज कर उनके आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
एक पत्रकार को अस्पताल की खामियां उजागर करना काफी महंगा पड़ गया। अस्पताल प्रशासन की कमियों व लापरवाहियों को उजागर करने पर एक पत्रकार के ऊपर कट्टे के बल पर 50000 रुपया मांगने का मनगढ़ंत आरोप मढ़ते हुए एक फ़र्ज़ी मुकदमा पंजिकृत कर दिया गया। आम तौर पर मामले की तहकीकात कर मुकदमा लिखने की बात कहने वाली पुलिस पत्रकार के खिलाफ मामला आते ही एक्टिव हो गयी और बिना कोई तहकीकात या पूछताछ किये मुकदमा पंजिकृत कर लिया। इस बात से नाराज़ जिले के पत्रकारों ने जिला सूचना कार्यालय में एक आपात बैठक बुलाई और पत्रकार पर पुलिस द्वारा लिखे गये फ़र्ज़ी मुकदमे का पुरजोर विरोध किया गया। पत्रकारों ने एक सुर में इसे न सिर्फ अमानवीय करार दिया बल्कि इसे निष्पक्ष पत्रकारिता पर करारा प्रहार बताया। बैठक में सभी ने इस विषय पर आरपार की लड़ाई लड़ने का आह्वाहन करते हुए आरोप मढ़ने वाले वाले आरोपी के खिलाफ सबूत इकट्ठे करते हुए उसके खोलाफ़ कड़ी क़ानूनी कार्यवाही की मांग करते हुए जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान से मिलन व उनको सारे सबूत सौंप आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया।
बीते दिन फ्री लांसर पत्रकार फ़राज़ अंसारी पर एक झूठा फ़र्ज़ी व कूटरचित एफआईआर दर्ज करा निष्पक्ष पत्रकारिता पर गम्भीर प्रहार किया गया। ये बाते बताते हुए पत्रकार फ़राज़ अंसारी ने बताया कि बीते दिनों उनके द्वारा जिला अस्पताल की कई खामियों को उजागर किया गया था जिसके बाद से आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने उनसे अस्पताल के बाहर पत्रकारिता करने को कहा। पत्रकार ने बताया कि जब उन्होंने कहा कि वह अपने दायित्वों व कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं तो आरोपी ने उन्हें अंजाम भुगतने व फ़र्ज़ी मुकदमो में फंसाने की धमकी दी थी। पत्रकार का कहना है कि इसके दूसरे दिन आरोपी ने उन्हें फोन कर मुकदमे में फंसाने की धमकियां दी थीं जिसके बाद उन्होंने इससे जिलाधिकारी महोदय को भी अवगत कराया था। पत्रकार का कहना है कि डीएम साहब को अवगत कराने के बाद उन्होंने मामले को हल्के में लेते हुए आगे की कोई कार्यवाही नही की क्योंकि उनका मानना था निष्पक्ष पत्रकारिता के आगे ये सब छोटी मोटी समस्याएं आती रहती हैं। पत्रकार पर फ़र्ज़ी एफआईआर दर्ज होने के बाद से जिले के पत्रकारों में काफी रोष पैदा हो गया है। पत्रकारों ने दोपहर को जिला सूचना कार्यालय में एक आपात बैठक बुलाई और प्रकरण पर गम्भीर चिंतन किया। बैठक में पत्रकारों ने कहा कि यह एक साजिश के तहत निष्पक्ष पत्रकारिता पर प्रहार है जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। इसके बाद बैठक में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से मिलकर आगामी रणनीति तय करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में संजय मिश्रा, अभिषेक शर्मा, रामबरन चौधरी, सन्तोष श्रीवास्तव, फहीम अहमद किदवई, रमेश गुप्ता, शादाब हुसैन, मोनिश अज़ीज़, अरशद क़ुददूस, फ़ैज़ खान, अब्दुल कादिर, कमल मसीह, निजामुद्दीन अख्तर, रामगोपाल गुप्ता, फहीम अहमद, अब्दुल कादिर “मुन्ना”, नूरआलम वारसी, रोहित श्रीवास्तव, अशफ़ाक़ अहमद, निशान्त गुप्ता, सन्दीप जायसवाल, सुहैल यूसुफ सिद्दीकी, विनोद त्रिपाठी, आशीष, वेद प्रकाश शर्मा सहित पत्रकार बन्धु मौजूद रहे।
एडीएम को पत्र सौंप कर की कार्यवाही की मांग
बहराइच जिला अस्पताल की खामियां उजागर करने पर दर्ज की गई फ़र्ज़ी एफआईआर के विरोध में जिले के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। अपनी एक जुटता दिखाते हुए जिले के पत्रकारों ने सूचना कार्यालय पहुंच पूरे घटनाक्रम पर विचारविमर्श किया। पत्रकारों ने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से मिलकर पूरे प्रकरण का पर्दाफाश कर वास्तविक स्थिति से अवगत कराना चाहा लेकिन समाधान दिवस में शहर से बाहर होने के चलते जिलाधिकारी व पुलिस कप्तान से भेंट न हो सकी। पत्रकारों ने दूरभाष पर जिलाधिकारी महोदया से वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया जिसके बाद जिलाधिकारी महोदय ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए एडीएम बहराइच को सूचना कार्यालय पत्रकारों की समस्या को सुनने के लिये भेजा। पत्रकारों ने संयुक्त रूप से संगठित होकर एडीएम महोदय को एक शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा फ़र्ज़ी मुकदमा कायम कराने वाले के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करने की मांग की जिसपर उचित व प्रभावी कार्यवाही करने का एडीएम बहराइच द्वारा आश्वासन दिया गया। विचार विमर्श के दौरान पत्रकारों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा की किसी भी हाल में निष्पक्ष पत्रकारिता पर लगाम लगाने वालों को बक्शा नहीं जायेगा। सूत्रों की मानें तो आरोप लगाने वाले व्यक्ति को मोहरा बना कर अस्पताल प्रशासन द्वारा फ़र्ज़ी मुकदमा कायम कराया गया है ताकि अस्पताल की खामियां व लापरवाहियों की खबरें उजागर न हो सकें और खबरें कवर करने वालों पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि पत्रकारों ने हुंकार भरते हुए कहा कि अस्पताल प्रशासन क्या बल्कि निष्पक्ष पत्रकारिता पर प्रहार करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।
