बुलढाणा में स्टिंग ऑपरेशन कर कलेक्टर का फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र बनाने का दांव मुकीम अहमद पर उल्टा पड़ा, हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ अपराध दर्ज | New India Times

कासिम खलील, बुलढाणा (महाराष्ट्र), NIT; ​बुलढाणा में स्टिंग ऑपरेशन कर कलेक्टर का फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र बनाने का दांव मुकीम अहमद पर उल्टा पड़ा, हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ अपराध दर्ज | New India Timesअकोला के तत्कालीन जिलाधिश मुथ्थुकृष्णन शंकरनारायण के फोटो के साथ उन्ही के नाम का बुलढाणा के जिला सरकारी अस्पताल में स्टींग आॅपरेशन कर कर्णबधीर का फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र बनाकर अकोला के सामाजिक कार्यकर्ता मुकीम अहेमद ने पुरे राज्य में हडकंप मचा दिया था. अब इसी फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र मामले ने एक नया मोड ले लिया है और मुकीम अहेमद को ही आरोपी के कटघरे में खडा कर दिया है।

इस मामले को जानने के लिये हमे फ्लैश बैक में जाना पडेगा….

 वर्ष 2010 के अंत में अकोला निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मुकीम अहमद को उनके बुलढाणा स्थित कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा जानकारी मिली की, बुलढाणा के जिला सरकारी अस्पताल में पैसे लेकर फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र बनाकर दिये जा रहे हैं। इस फर्जीवाडे को बेनकाब करने के लिये मुकीम अहमद ने अपने कुछ कार्यकर्ताओं को बुलढाणा के सरकारी अस्पताल में विकलांग प्रमाणपत्र बनाने के लिये भेजा। कार्यकर्ता के पास अकोला के तत्कालीन जिलाधिश मुथ्थुकृष्णन शंकरनारायण का फोटो दिया। दलाल ने 7 हजार रुपए की रकम लेकर जिस व्यक्ती का प्रमाणपत्र बनाया जा रहा है उसे देखे बिना ही 28 दिसंबर 2010 को 70 फीसद कर्णबधीर विकलांगता का प्रमाणपत्र जारी करा दिया। बुलढाणा के जिला सरकारी अस्पताल से यह प्रमाणपत्र जारी किये जानी के बाद उसकी सत्यता जांचने के लिये मुकीम अहमद ने जिला अस्पताल में सुचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी,  जिस में यह बताया गया की मुथ्थुकृष्णन शंकरनारायण के नाम से विकलांग प्रमाणपत्र जारी किया गया है। यह अधिकृत जानकारी मिलने के बाद मुकीम अहमद ने जनवरी 2011 में पत्रकार परिषद लेते हुए इस फर्जीवाडे का पर्दाफाश किया था तथा इस मामले को अकोला के तत्कालीन जिलाधीश मुथ्थुकृष्णन शंकरनारायण ने गंभीरता से लिया और उन्होंने इस फर्जीवाडे मामले में अकोला के थाने में लिखीत रुप से शिकायत दर्ज कराई थी।  बुलढाणा के जिला सरकारी अस्पताल के विकलांग बोर्ड में शामिल कर्णबधीर तज्ञ डॉ.जे.बी.राजपूत, प्रभारी सी.एस.डॉ.अशोक हिवाले, डॉ. अवाके, पार्षद मो. सज्जाद तथा अन्य एक लिपीक इस प्रकार कुल पांच लोगों पर अपराध दर्ज किया गया था।

विगत 25 फरवरी 2018 को बुलढाणा उपविभागीय पुलिस अधिकारी बी.बी. महामुनी ने इसी फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र मामले में सामाजिक कार्यकर्ता मुकीम अहमद अ. रशीद, अमीर मुश्ताक  अ.नबी (दोनो निवासी अकोला) मो. तौसिफ मो. युसुफ तथा समीर खान नजमोद्दीन खान (दोनो निवासी बुलढाणा) के खिलाफ बुलढाणा शहर थाने में भादंवी की धारा 420, 468, 471, 34 के तहत अपराध दर्ज कर आज मुकीम अहमद व अमीर मुश्ताक को अकोला से तथा मो.तौसिफ  व समीर खान को बुलढाणा से गिरफ्तार किया है।​
बुलढाणा में स्टिंग ऑपरेशन कर कलेक्टर का फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र बनाने का दांव मुकीम अहमद पर उल्टा पड़ा, हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ अपराध दर्ज | New India Timesसन 2011 में डॉक्टरों पर दर्ज हुई एफआईआर को क्रेश करने के लिये आरोपी डॉक्टर नागपूर हायकोर्ट से रुजू हुए थे।  इस समय कोर्ट ने मामले को बारिकी से देखा और बेंच के न्यायाधिश आर.के.देशपांडे व एम.जी. गिरटकर ने आदेश देते हुए कहा की फर्जी विकलांग प्रमाणपत्र का स्टिंग आॅपरेशन करना गैरकानुनी है तथा स्टिंग के लिये जिलाधीश के फोटो को मोडिफिकेशन किया गया है तथा निवास प्रमाणपत्र भी फर्जी बनाया गया है। इस स्टिंग आॅपरेशन को गलत ठहराते हुए इस में शामिल लोगों पर अपराध दर्ज करने का आदेश 5 फरवरी 2018 को दिया गया था।

तबीयत बिगडी, अस्पताल में दाखील

बुलडाणा के जिला सरकारी अस्पताल में चलने वाले विकलांग प्रमाणपत्रों के फर्जीवाडे को एक स्टिंग आॅपरेशन के माध्यम से बेनकाब करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मुकीम अहमद पर इसी मामले में कोर्ट के आदेश पर अपराध दर्ज होने के बाद बुलढाणा शहर थाने के पीएसआई मुकुंद देशमुख ने आज मुकीम अहमद व उनके एक साथी अमीर मुश्ताक को अकोला से हिरासत में लेकर बुलढाणा पहुंचे। आरोपियों की मेडिकल जांच के लिये जिला सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ पर जांच में पता चला की मुकीम अहमद का ब्लड प्रेशर बढा  हुआ है, जिसे देखते हुए डॉक्टर ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया है। खास बात तो यह है कि, जिस अस्पताल का फर्जीवाड़ा मुकीम अहमद ने बेनकाब किया था आज उसी अस्पताल में वे एडमिट हैं।

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