मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई को किस तरह निजी जागीर समझकर लुटाया जाता है, इसका जीता-जागता उदाहरण दमुआ नगर पालिका में सामने आया है। हर्रई से तबादला होकर दमुआ पहुंचीं तत्कालीन सीएमओ पूजा बुनकर के कार्यकाल पर आखिरकार शासन ने कार्रवाई की है। वित्तीय नियमों को दरकिनार कर की गई मनमानी खरीद-फरोख्त की जांच पूरी होने के बाद शासन ने उनकी दो वेतन वृद्धियां रोकने के साथ 7.16 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश दिया है।
जांच में हुए बड़े खुलासे
1. जेम पोर्टल का खेल और चहेतों को लाभ: सरकारी नियमों की अनदेखी कर बाजार दर से कई गुना महंगे और घटिया गुणवत्ता के डस्टबिन खरीदे गए। जांच में सामने आया कि खरीदी जेम पोर्टल पर पंजीकृत सीएमओ की करीबी रिश्तेदार की फर्म से की गई थी। डस्टबिन की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि वे तेल के पीपे (टीन) से भी ज्यादा पतले निकले।
2. स्वच्छता के नाम पर बंदरबांट: स्वच्छता जंक्शन पर बने ट्रेन मॉडल, सेल्फी पॉइंट, हाई मास्ट पोल और एलईडी स्ट्रीट लाइटों के नाम पर जमकर अनियमितताएं की गईं। कागजों में विकास दिखा, लेकिन जमीनी हकीकत में कमीशनखोरी हुई।
3. महीने भर में उखड़ी सड़कें: नगर पालिका द्वारा बनाई गई लाखों रुपये की सीमेंट सड़कें एक महीने में ही उखड़ गईं और उनकी गिट्टियां बिखरकर भ्रष्टाचार की पोल खोलने लगीं।
क्या 7.16 लाख सिर्फ झांकी है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि 7.16 लाख रुपये की रिकवरी तो सिर्फ एक हिस्सा है। यदि पूजा बुनकर के हर्रई से लेकर अब तक के पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष और सूक्ष्म जांच कराई जाए, तो यह आंकड़ा करोड़ों में पहुंच सकता है।
जनता का सवाल है कि क्या केवल वेतन वृद्धि रोकने और रिकवरी से सिस्टम सुधरेगा? जब तक दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा। अब देखना है कि क्या शासन इस पूरे मामले की जड़ तक जाएगा या मामला केवल वसूली तक ही सीमित रह जाएगा।

