अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वक्फ बोर्ड के गठन, मस्जिदों के संरक्षण और उज्जैन की हालिया घटनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रारंभ से ही सरकारों के प्रभाव में गठित होते आ रहे वक्फ बोर्डों के कारण वक्फ संपत्तियों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है। इसी कारण जमीयत उलमा-ए-हिंद लगातार यह मांग करती रही है कि वक्फ बोर्ड को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त कर उसका गठन सिख समाज की गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की तर्ज पर किया जाए, ताकि वह किसी भी राजनीतिक प्रभाव के बिना वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण का कार्य कर सके।

उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद और मस्जिद के कुछ हिस्सों को तोड़े जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि हमारे देश भारत में यह परंपरा रही है कि मंदिर और मस्जिदों को सुरक्षित रखते हुए उनके लिए रास्ते बनाए जाते रहे हैं, लेकिन वर्तमान समय में देश के विभिन्न हिस्सों में रास्तों के विस्तार और कॉरिडोर के नाम पर मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है। मस्जिदों को सुरक्षित रखने के लिए उपलब्ध वैकल्पिक उपायों पर विचार किए बिना सरकार द्वारा जल्दबाजी में इस प्रकार की कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां सरकारों की नीयत पर सवाल खड़े करती हैं।
देश के विभिन्न राज्यों में मस्जिदों को तोड़े जाने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मस्जिदों को लगातार निशाना बनाए जाने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। उज्जैन की तकिया मस्जिद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसे भी महाकाल मंदिर की पार्किंग के नाम पर पूरी तरह तोड़ दिया गया, जबकि वह पार्किंग के रास्ते से काफी दूर स्थित थी। यदि वास्तव में मंदिर के लिए पार्किंग की आवश्यकता थी तो पार्किंग को बहुमंजिला बनाया जा सकता था, लेकिन बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के मस्जिदों को निशाना बनाया जाना सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने आगे कहा कि उज्जैन शहर के बीच पहले से कई अन्य मंदिर और मस्जिदें मौजूद हैं, लेकिन केवल शाही मस्जिद को निशाना बनाया जाना अफसोसनाक है। उन्होंने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यदि प्रशासन चाहता तो मस्जिद के सामने स्थित संदल वाली इमारत को रास्ता चौड़ा करने के लिए अधिग्रहित किया जा सकता था और संबंधित संपत्ति के मालिक को उचित मुआवजा दिया जा सकता था। आवश्यकता पड़ने पर मुस्लिम समाज भी संपत्ति के मालिक को भुगतान करने के लिए तैयार था, लेकिन प्रशासन ने ऐसे किसी विकल्प को नहीं अपनाया।
शाही मस्जिद के मामले में उन्होंने आगे कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वाले नागरिकों के साथ प्रशासन द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई और उचित जांच के बिना सैकड़ों लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की कि मारपीट के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और इस मामले में दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लेकर बेगुनाह लोगों को तुरंत रिहा किया जाए।
इसी प्रकार उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार उज्जैन में कई अन्य मस्जिदों की भी सूची प्रशासन ने बना रखी है, जिन्हें कॉरिडोर और अन्य आवश्यकताओं के नाम पर तोड़ने की योजना है। मध्य प्रदेश सरकार को उज्जैन प्रशासन की इस प्रकार की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश देने चाहिए और कॉरिडोर व अन्य आवश्यकताओं के लिए वैकल्पिक उपायों का उपयोग किया जाना चाहिए।

