कासिम खलील, बुलढाणा (महाराष्ट्र),NIT;
महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम की बस में सवार होकर खामगांव से बुलढाणा की तरफ आ रहे विकलांग युवक दानिश अमीन की विकलांग सहुलत की पास को जाली बताते हुए महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम के उडन दस्ते के टिकिट चेकरों ने पास छिन कर पुरा टिकट लेने लगाया तथा विकलांग युवक को अपमानित किया था। अपने ऊपर हुए इस अन्याय के खिलाफ विकलांग युवक ने बुलढाणा जिलाधीश कार्यालय के समक्ष 18 जनवरी से बेमियादी आमरण अनशन आरंभ किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों ही टिकिट चेकरों को 20 जनवरी को एक आदेश के तहत निलंबित करते हुए पीड़ित युवक को एसटी विभाग ने न्याय दिया है।
बता दें कि बुलढाणा निवासी पीडित दोनों पैरों से विकलांग युवक सै.दानिश सै.अमीन ने अपने ज्ञापन में बताया की वह पिछले कुछ दिन पहेले अपने उपचार के लिये शेगांव गया था। वहाँ से वापसी में वह राज्य परिवहन निगम की बस में लौट रहा था। उस समय उसने अपनी विकलांगता की पास बताकर सहूलत वाला टिकीट खरिदा। इस बीच बस बुलढाणा की तरफ आ रही थी कि बीच रास्ते में बोथा घाट में परिवहन निगम के उडन दस्ते ने बस रोकी और सभी के टिकीट चेक करते समय विकलांग दानिश से विकलांगता की पास मांगने पर उसने पास दिखाई तब टिकीट चेकर भास्कर वाघ व प्रमोद सनगाले ने इस पास को जाली बताते हुए पास जब्त कर ली और युवक को अपमानित करते हुए पुरा टिकीट लेने लगाया। इस घटना के बाद पिडीत युवक काफी घबरा गया। उसने इस अन्याय की शिकायत एसटी के संबंधित अधिकारीयों व जिला प्रशासन से की किंतु 20 दिन गुजर जाने के बावजुद भी टिकीट चेकर भास्कर वाघ व प्रमोद सनगाले पर कोई कारवाई नहीं होने के कारण 18 जनवरी से पिडीत विकलांग सै.दानिश ने बुलढाणा जिलाधीश कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन जारी करते हुए दोषी टिकीट चेकरों पर कडी कार्रवाई की मांग की थी।
इस बीच स्थानिक सामाजिक संगठन व राजकीय पक्षों के पदाधिकारी भी विकलांग दानिश को न्याय दिलाने के लिए आगे आने के बाद एसटी के वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बढ़ने लागा था। विकलांगों के न्याय, हक़ के लिए हमेशा आगे रहने वाले प्रहार संगठन के विधायक बच्चू कडु ने भी दोषी टिकिट चेकरों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। तत्पश्चात एसटी के विभाग नियंत्रक श्री.मेहतर ने अपनी प्राथमिक जांच में दोनों टिकिट चेकरों को दोषी पाए जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया तथा निलंबन पत्र अनशनकर्ता दानिश के सुपुर्द किये जाने के बाद यह अनशन समाप्त हो गया। न्याय मिलने के बाद से विकलांग दानिश के चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गई है।
