आचार्य श्री हेमेन्द्रसूरीश्वरजी की 16वीं पुण्यतिथि पर भावपूर्ण गुणानुवाद सभा | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पुण्यधरा पर मंगलवार को परम पूज्य शासन प्रभावक, वचनसिद्ध एवं सरलमना आचार्य प्रवर श्रीमद् विजय हेमेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब की 16वीं पुण्यतिथि भावपूर्ण वातावरण में तप-जप एवं गुरु गुणानुवाद के साथ मनाई गई। अत्र विराजित परम पूज्य साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्री संघ के श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्य श्री के जीवन एवं जिनशासन के प्रति उनके अविस्मरणीय योगदान का स्मरण करते हुए भावांजलि अर्पित की।

पुण्यतिथि के अवसर पर प्रातः 8 बजे बावन जिनालय स्थित गुरु मंदिर में अनिल कुमार एवं सुनील कुमार राठौर परिवार द्वारा पूज्य आचार्य श्री के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। मनोहरलाल एवं प्रतीक कुमार मोदी परिवार ने दीप प्रज्ज्वलित किया, जबकि अशोक कुमार एवं समरथमलजी राठौर परिवार ने आरती का लाभ लिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु भगवंत के समक्ष गुरु वंदन कर उनके उपकारों एवं जिनशासन के प्रति उनके महान योगदान को भावपूर्वक स्मरण किया।

श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि आचार्य भगवंत श्री हेमेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित की।

गुणानुवाद सभा में हुआ आचार्य श्री के गुणों का स्मरण

श्री संघ द्वारा आयोजित गुरु गुणानुवाद सभा में साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी महाराज साहेब ने आचार्य श्री के जीवन एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य श्री अत्यंत सरल, सहज एवं विनयशील व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने जीवन में अनेक महान तप-आराधनाएं कीं। वे विनय के भंडार एवं तपस्वीरत्न थे। उन्होंने अपने संयम जीवन की उत्कृष्ट साधना के साथ जिनशासन के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए तथा धर्म प्रभावना को निरंतर आगे बढ़ाया।

साध्वी श्री ने कहा कि आचार्य श्री का जीवन साधना, संयम, तप, विनय और सरलता का प्रेरणादायी संगम था। उनके जीवन से आत्मकल्याण के साथ जिनशासन की प्रभावना एवं गुरु भक्ति की प्रेरणा प्राप्त होती है।

गुणानुवाद सभा में श्री संघ के वरिष्ठ सदस्य धर्मचंद मेहता एवं श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने भी आचार्य भगवंत के गुणों का स्मरण करते हुए कहा कि आचार्य श्री की स्मरण शक्ति अद्भुत थी। वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके नाम एवं गांव से पहचानते थे। वे ज्ञान के भंडार एवं वचनसिद्ध आचार्य भगवंत थे।

उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने अनेक तीर्थों का उद्धार एवं जीर्णोद्धार करवाकर जिनशासन की प्रभावना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे भारतवर्ष में पैदल विहार कर भगवान महावीर की अमर वाणी को जन-जन तक पहुंचाने का महान कार्य किया। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, संयम, ज्ञान और धर्म प्रभावना के लिए समर्पित रहा।

सभा के दौरान उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने पूज्य आचार्य श्री के जीवन प्रसंगों एवं गुणों का भावपूर्वक श्रवण किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरा वातावरण गुरु भक्ति एवं श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा।

इस अवसर पर श्री संघ के उपाध्यक्ष मुकेश रूनवाल, नरेंद्र संघवी सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।

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