मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत बुरहानपुर में संचालित दारुल कज़ा (शरई मसाइल समाधान केंद्र) पिछले कई वर्षों से मुस्लिम समाज के लिए महत्वपूर्ण दीनी और शरई संस्था के रूप में सेवाएं दे रहा है। यहां आपसी विवादों, पारिवारिक एवं सामाजिक मामलों का इस्लामी शरीयत की रोशनी में कम समय और कम खर्च में समाधान करने का प्रयास किया जाता है।
दारुल कज़ा बुरहानपुर के मुफ्ती काज़ी-ए-शरीयत मुफ्ती रहमतुल्लाह क़ासमी की निगरानी में संस्थान का कार्य सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है। वहीं, नौजवान आलिम-ए-दीन एवं नायब काज़ी-ए-शरीयत मुफ्ती मोहम्मद अज़हर मुत्तक़ी क़ासमी भी मुस्लिम समाज के शरई मामलों के समाधान और शरीयत के मुताबिक फैसलों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं।
मौजूदा दौर में मुस्लिम समाज के पारिवारिक, सामाजिक और आपसी मामलों को इस्लामी शरीयत के मुताबिक हल करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे में दारुल कज़ा जैसे शरई समाधान केंद्रों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ये केंद्र विवादों को सुलह और शरीयत के मुताबिक हल करने के साथ समाज में आपसी एकता, भाईचारे, विश्वास और इस्लामी मूल्यों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुफ्ती मोहम्मद अज़हर मुत्तक़ी क़ासमी की दीनी, इल्मी और शरई सेवाओं को देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के केंद्रीय जिम्मेदारों ने उन्हें दारुल कज़ा खंडवा के काज़ी की जिम्मेदारी सौंपी है।
दारुल कज़ा बुरहानपुर की सेवाओं की सराहना करते हुए बोर्ड की ओर से उम्मीद जताई गई है कि मुफ्ती रहमतुल्लाह क़ासमी और उनके सहयोगियों के प्रयासों से शरीयत के मुताबिक मामलों के समाधान का यह महत्वपूर्ण कार्य और अधिक मजबूत होगा। मुफ्ती मोहम्मद अज़हर मुत्तक़ी क़ासमी को दारुल कज़ा खंडवा की जिम्मेदारी सौंपा जाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बुरहानपुर के नौजवान आलिम-ए-दीन एवं नायब काज़ी-ए-शरीयत मुफ्ती मोहम्मद अज़हर मुत्तक़ी क़ासमी को खंडवा में काज़ी की जिम्मेदारी मिलने से बुरहानपुर के उलमा-ए-किराम में खुशी का माहौल है।
दीनी और शरई मामलों के विशेषज्ञ उलमा की निगरानी में संचालित दारुल कज़ा केंद्र मुस्लिम समाज के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि छोटे-मोटे मतभेदों को बढ़ाने या अनावश्यक कानूनी पेचीदगियों में उलझने के बजाय आपसी रज़ामंदी, सुलह और शरीयत के उसूलों के मुताबिक मामलों के समाधान का रास्ता उपलब्ध होता है।
समाजजनों से अपील की गई है कि वे ऐसे शरई इदारों से लाभ उठाएं और अपने आपसी एवं पारिवारिक मामलों को शरीयत-ए-मुतहरा की रोशनी में सुलझाने का प्रयास करें।

