रफीक़ आलम, दमुआ/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जनपद पंचायत जुन्नारदेव के सभागृह में पेसा एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरपंचों और पंचायत सचिवों का दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जनपद पंचायत सीईओ रश्मि चौहान तथा मास्टर ट्रेनर एवं जिला समन्वयक कमलेश टेकाम और राजू बर्मन ने पेसा एक्ट के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि पेसा एक्ट के तहत आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किए गए हैं। जल, जंगल और जमीन सहित प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित किया गया है। लघु वनोपज के संग्रहण, प्रबंधन और उपयोग में ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है।
भूमि अधिग्रहण, आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण एवं बिक्री पर रोक तथा पुनर्वास संबंधी मामलों में ग्राम सभा की पूर्व अनुमति को आवश्यक बताया गया। इसी तरह रेत, गिट्टी सहित खनिजों के उत्खनन और खनन पट्टे के लिए ग्राम सभा की सिफारिश की आवश्यकता पर भी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में ग्राम सभा को स्थानीय हाट-बाजार के प्रबंधन, शराब की बिक्री एवं उपयोग को नियंत्रित करने तथा साहूकारी व्यवस्था के विनियमन से जुड़े अधिकारों के बारे में भी बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि पेसा एक्ट का उद्देश्य आदिवासी समुदाय को शोषण से सुरक्षा देने के साथ उनकी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और आजीविका के साधनों को संरक्षण प्रदान करना है।
वक्ताओं ने कहा कि गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी, सड़क और अन्य विकास कार्यों से जुड़े निर्णय ग्राम सभा के माध्यम से लिए जा सकेंगे। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित होगी। पंचायत सचिवों को निर्देशित किया गया कि वे पेसा एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप आदिवासी समुदाय को शासन की योजनाओं और अधिकारों का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाएं।
प्रशिक्षण में जनपद पंचायत के वरिष्ठ अधिकारी, उपयंत्री, सहायक यंत्री, विभिन्न विभागों के अधिकारी, सरपंच एवं पंचायत सचिव मौजूद रहे। अधिकारियों ने पेसा एक्ट के सभी प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

