संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत अक्षय ऊर्जा के उत्पादन एवं संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा ऊर्जा के उपयोग तथा ऊर्जा संरक्षण से जुड़ी भारतीय परंपराओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीना श्रीवास्तव ने की। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा में ऊर्जा के महत्व और प्राचीन ऊर्जा संरक्षण पद्धतियों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में डॉ. आशा बाजपेयी ने ऊर्जा संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युवाओं में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. नीना अग्रवाल ने सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने सौर ऊर्जा को स्वच्छ और उपयोगी ऊर्जा स्रोत बताते हुए इसके अधिकाधिक उपयोग के लिए जागरूक किया।
इस अवसर पर डॉ. कमल हिंडोरिया ने ऊर्जा संरक्षण एवं उत्पादन विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. राहुल सत्य ने ऊर्जा संरक्षण का संदेश देते हुए ऊर्जा के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से अक्षय ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग तथा ऊर्जा संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित ऊर्जा संरक्षण की अवधारणाओं को वर्तमान समय से जोड़ते हुए विद्यार्थियों एवं समाज में अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा।

