मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
क्षेत्र में 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नौलाखापा और बुर्रीखुर्द में हाई रिस्क डिलीवरी के मामलों में समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने से गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। एक मामले में विवादों में रहने वाली 112 डायल सेवा ही प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला के लिए सहारा बनी।
जानकारी के मुताबिक, जुन्नारदेव के अंतर्गत नौलाखापा निवासी सीमा पति रविंद्र अमरवंशी, उम्र 27 वर्ष, को गर्भावस्था के अंतिम महीने में देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने रात करीब 11 बजे 108 एंबुलेंस की सहायता के लिए फोन किया, लेकिन करीब तीन घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। महिला की प्रसव पीड़ा लगातार बढ़ती रही।
इसके बाद परिजनों ने 112 डायल किया। सूचना मिलते ही 112 वाहन के पायलट शिवकुमार अमरवंशी और आरक्षक योगेश जांगले तत्काल मौके पर पहुंचे और महिला को जुन्नारदेव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार महिला की स्थिति हाई रिस्क डिलीवरी की होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।
वहीं, दूसरा मामला बुर्रीखुर्द का है। यहां अंतिम महीने में क्रिटिकल स्थिति में पहुंची रोशनी उईके, उम्र 35 वर्ष, को जुन्नारदेव अस्पताल से डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया था। परिजनों द्वारा सुबह करीब 6 बजे से लगातार 108 एंबुलेंस के लिए फोन किया गया, लेकिन करीब चार घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची। इस दौरान महिला और उसके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एक नज़र इधर भी
हैरत की बात यह है कि किसी मरीज को रेफर किए जाने के बाद डॉक्टर, नर्स और परिजन मिलकर 108 एंबुलेंस के लिए लगातार फोन करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। एंबुलेंस के इंतजार में मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ अस्पताल का स्टाफ भी परेशान होता है।
ऐसे मामलों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। खासकर गर्भवती महिलाओं के हाई रिस्क मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 108 एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कब तक सुधरेगी?
जानकारी के अनुसार, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुरेश नागवंशी द्वारा भी 108 एंबुलेंस की सुविधाओं को बेहतर बनाने के संबंध में पत्राचार किया जा चुका है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और क्षेत्र के मरीजों को समय पर एंबुलेंस की सुविधा कब तक मिल पाती है।

