बारिश में उजड़े सैकड़ों आशियाने, मानवाधिकार संगठन ने पुनर्वास की  उठाई मांग | New India Times

जुबेर आलम, संवाददाता, भोपाल (मप्र), NIT:

राजधानी के नारियलखेड़ा (फिजा कॉलोनी) क्षेत्र में बीते दिनों जिला प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद वहां रह रहे सैकड़ों परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि कई परिवार वर्ष 1984-85 से यहां रहकर अपनी गृहस्थी चला रहे थे। कार्रवाई के बाद ये परिवार मानसूनी बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

अदालती आदेशों के तहत की गई इस कार्रवाई को लेकर सामाजिक एवं मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताते हुए प्रशासन से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और तत्काल राहत व्यवस्था की मांग की है।

‘कानून के पालन के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी’—जमशेद आलम

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ज्यूडिशियल सिक्योरिटी काउंसिल के मध्य प्रदेश जनरल सेक्रेटरी जमशेद आलम ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन को अदालती आदेशों का पालन कराने के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाना चाहिए था।

उन्होंने कहा, “प्रशासन को कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और पुनर्वास की योजना पर विचार करना चाहिए था। इतने लंबे समय से बसे परिवारों के घरों पर कार्रवाई के बाद इस मूसलाधार बारिश में छोटे बच्चों और बुजुर्गों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।”

जमशेद आलम ने कहा कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान नागरिकों के बुनियादी अधिकारों और मानवीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के खुले आसमान के नीचे छोड़ना गंभीर मानवीय चिंता का विषय है।

बुनियादी सुविधाओं के बावजूद बेदखली का दावा

प्रभावित रहवासियों का कहना है कि वे कई दशकों से यहां रह रहे थे। उनके पास बिजली और पानी के कनेक्शन होने के साथ ही वे नियमित रूप से सरकारी कर भी जमा करते रहे हैं। रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था किए जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।

मानवाधिकार संगठन की प्रमुख मांगें

जमशेद आलम और उनकी काउंसिल ने शासन-प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

तत्काल राहत और शेल्टर: बेघर हुए परिवारों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन एवं आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।

स्थायी पुनर्वास: प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य पात्र सरकारी योजनाओं के तहत नियमानुसार वैकल्पिक आवास या भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

मानवीय दृष्टिकोण: संगठन ने कहा कि वह कानून और न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों की मानवीय स्थिति और पुनर्वास को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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