मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

इंदौर जिले में 30 जून 2026 तक बोरिंग पर प्रतिबंध के बावजूद 23 जून 2026 को कराई जा रही कथित अवैध बोरिंग के दौरान भूमिगत गैस पाइपलाइन में हुए विस्फोट के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की पुनः सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और नगर निगम इंदौर को इलाज के खर्च के भुगतान के लिए बराबर का जिम्मेदार मानते हुए, हादसे में झुलसे लोगों के इलाज से संबंधित लंबित बिलों का भुगतान एक सप्ताह के भीतर करने के आदेश 7 अगस्त 2026 को जारी किए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस हादसे में कम से कम पांच राहगीर झुलसे थे। इनमें थर्ड डिग्री तक झुलसी कु. जीनी झाला भी शामिल हैं। उनकी ओर से बुरहानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिसिंग एडवोकेट श्री मनोज कुमार अग्रवाल पैरवी कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के 24 जून 2026 के आदेश के बाद 25 जून 2026 को कु. जीनी झाला को एयर एंबुलेंस के माध्यम से इंदौर से अहमदाबाद स्थित ज़ाइडस हॉस्पिटल ले जाया गया था। तब से वह अस्पताल में भर्ती हैं और 8 अगस्त 2026 तक उनका उपचार जारी है।
अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि सरकार द्वारा अब तक अस्पताल के इलाज संबंधी बिलों का भुगतान नहीं किया गया था। इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट को अवगत कराया। इसके बाद 7 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में न्यायालय ने सरकार और नगर निगम इंदौर को इलाज के लंबित बिलों का भुगतान एक सप्ताह के भीतर करने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट के इस आदेश से हादसे में झुलसे लोगों और उनके परिजनों को इलाज के खर्च को लेकर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

