राकेश यादव, ब्यूरो चीफ, सागर (मप्र), NIT:

देवरी नगर के वरिष्ठ समाजसेवी, प्रसिद्ध मिठाई शिल्पकार एवं बालूशाही के लिए विख्यात भगवानदास नेमा का बुधवार सुबह हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। पिछले 10 से 15 दिनों से अस्वस्थ चल रहे भगवानदास नेमा का सागर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहां जांच में उनके फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। बुधवार सुबह करीब 6:45 बजे उन्होंने अपने निवास पर अंतिम सांस ली।

शाम को उनकी अंतिम यात्रा तिलक वार्ड स्थित निवास से निकाली गई, जो सहजपुर रोड स्थित मुक्तिधाम पहुंची। वहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र दिलीप नेमा ने मुखाग्नि दी।
भगवानदास नेमा गणेश स्वीट्स परिवार के प्रेरणास्रोत थे। वे वरिष्ठ भाजपा नेता दिलीप नेमा, राजेश नेमा, मनोज नेमा और आशीष नेमा के पिता तथा पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेखा नेमा के ससुर थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
21 अप्रैल 1932 को शास्त्री वार्ड में जन्मे भगवानदास नेमा ने संघर्ष, सादगी और ईमानदारी के साथ अपना जीवन व्यतीत किया। पारंपरिक मिठाई निर्माण कला में उन्हें विशेष महारत हासिल थी। खासकर उनके हाथों से बनाई जाने वाली बालूशाही पूरे जिले में अपनी अलग पहचान रखती थी। इसके अलावा मुहर्रम की रेवड़ी और मगध के लड्डू भी उनके विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध थे।
भगवानदास नेमा केवल व्यवसाय तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। बंधा घाट स्थित सिद्ध गणेश मंदिर के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं धुलतरा स्थित सहस्त्र लिंगेश्वर महादेव शिवधाम के निर्माण की प्रेरणा का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। वे भगवान गणेश के अनन्य भक्त थे और समाज सेवा को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य मानते थे।
अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एवं नगरवासी शामिल हुए। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत भगवानदास नेमा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सामाजिक एवं धार्मिक योगदान को सदैव स्मरणीय बताया।

