फैय्याज़ खान, नई दिल्ली, NIT:

मई 2026 में सामने आए घटनाक्रमों ने भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के असंतोष को लेकर देशभर में नई बहस छेड़ दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक अदालत में की गई टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसे कई छात्रों और युवाओं ने अपमानजनक बताते हुए सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने 16 मई 2026 को व्यंग्यात्मक अभियान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की शुरुआत की। देखते ही देखते यह अभियान लाखों युवाओं के समर्थन के साथ एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता गया।
वर्तमान में आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारी छात्रों और CJP का आरोप है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। आंदोलनकारी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ NEET-UG 2026 पेपर लीक की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने, सरकारी भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है।
इस बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। छात्रों का कहना है कि यह केवल NEET-UG 2026 का मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में UGC-NET, विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोग (PSC), पुलिस भर्ती, SSC सहित कई प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं के आरोपों के कारण विवादों में रही हैं। उनका कहना है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से लोकप्रियता हासिल की और युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। पार्टी न्यायपालिका में पारदर्शिता, मतदाता अधिकारों की सुरक्षा, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी, मीडिया की स्वतंत्रता और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रही है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग का प्रतीक बन चुका है।
आंदोलन के बढ़ते प्रभाव के बीच इसे लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कुछ नेताओं ने आंदोलन पर सवाल उठाए, जबकि समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुई कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी बहस जारी है।
सरकार का कहना है कि पेपर लीक रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया गया है, जिसके तहत पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके अलावा परीक्षा व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने, NTA में प्रशासनिक सुधार करने, कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा जांच एजेंसियों को सख्त निर्देश देने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। सरकार का दावा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, जबकि आंदोलनकारी इन कदमों को अभी अपर्याप्त मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, ‘कॉकरोच क्रांति’ अब केवल एक सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं रह गई है, बल्कि यह युवाओं के आक्रोश, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का राष्ट्रीय प्रतीक बनकर उभरी है। अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर टिकी है, क्योंकि उसके परिणाम देश की परीक्षा व्यवस्था और छात्र राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

