देवरी में 4 स्कूल मर्ज, पर कक्षाएं पुरानी इमारतों में, बच्चे-शिक्षक ‘पेंडुलम’ जैसी स्थिति में | New India TimesOplus_131072

राकेश यादव, ब्यूरो चीफ, सागर (मप्र), NIT:

देवरी क्षेत्र में चार शासकीय स्कूलों के सैंडिपनी हायर सेकेंडरी स्कूल में विलय के बाद अजीबो-गरीब स्थिति बन गई है। जहां एक ओर 403 विद्यार्थियों का नामांकन सैंडिपनी स्कूल में कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर उनकी कक्षाएं अब भी पुराने स्कूल भवनों में संचालित हो रही हैं। इससे बच्चे और शिक्षक ‘घड़ी के पेंडुलम’ की तरह इधर-उधर आने-जाने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के निर्देश पर दो किलोमीटर परिधि के भीतर आने वाले विद्यालयों को सैंडिपनी मॉडल स्कूल में मर्ज किया गया। इसके तहत शासकीय कन्या माध्यमिक शाला तिलक वार्ड, शिक्षा सदन स्कूल, महाकाली वार्ड प्राथमिक शाला और ग्राम छीर की प्राथमिक शाला के कुल 403 विद्यार्थियों का विलय किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी ने 8 मई को इसके संचालन का आदेश भी जारी किया था।

हालांकि, छोटे बच्चों को एक किलोमीटर दूर स्कूल भेजने और परिवहन व्यवस्था नहीं होने को लेकर अभिभावकों ने विरोध जताया। मामला विधायक बृज बिहारी पटेरिया तक पहुंचा, जिन्होंने कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर पुराने स्कूलों का संचालन यथावत रखने की अनुशंसा की। इसके बावजूद अब तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुआ है।
वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यार्थियों का नामांकन सैंडिपनी स्कूल में है, लेकिन पढ़ाई पुराने भवनों में ही कराई जा रही है। यहां बच्चों को बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और वे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के लिए प्रतिदिन एक किलोमीटर दूर सैंडिपनी स्कूल जाकर उपस्थिति दर्ज करानी पड़ रही है।

दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश छात्र सैंडिपनी स्कूल में पढ़ने के इच्छुक हैं। कई विद्यार्थियों ने कहा कि वे पैदल जाकर भी वहां पढ़ाई करना चाहते हैं। शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों ने भी लगभग 99 प्रतिशत सहमति जताई है।
इस संबंध में सैंडिपनी स्कूल के प्राचार्य सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि परिवहन सुविधा के अभाव में फिलहाल पुराने कैंपस में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, जबकि सभी स्कूलों की मॉनिटरिंग सैंडिपनी स्कूल से की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला शिक्षा अधिकारी से अभी तक कोई नया अधिकृत आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

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