मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

नगर के नवनिर्मित ओवरब्रिज पर स्थापित स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि बिजली फिटिंग में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, ओवरब्रिज पर लगाई गई स्ट्रीट लाइटों के हैंडओवर के संबंध में एमपीआरडीसी विभाग ने नगर पालिका को पत्र भेजा था। इसके जवाब में मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता द्वारा प्रस्तुत 58,666 रुपये की थ्री-फेज स्थायी विद्युत कनेक्शन की डिमांड राशि भारतीय स्टेट बैंक के खाते में जमा कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए थे, ताकि स्ट्रीट लाइटों का हैंडओवर किया जा सके।
बताया गया है कि राशि जमा होने के बावजूद आज तक हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसके कारण ओवरब्रिज पर अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और केवल कुछ ही लाइटें जल रही हैं। इस समस्या को लेकर समय-समय पर समाचार भी प्रकाशित होते रहे हैं, लेकिन एमपीआरडीसी विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
इसके अलावा, ओवरब्रिज पर की गई बिजली फिटिंग में भी गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। स्ट्रीट लाइट पोलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने भी लिखित रूप से एमपीआरडीसी एवं निर्माण एजेंसी को अवगत कराया है कि स्ट्रीट लाइट पोलों के अंदर केबल एवं जॉइंट में आवश्यक सुरक्षा प्रबंध नहीं किए गए हैं। कहीं भी जंक्शन प्वाइंट नहीं बनाए गए हैं, जिससे पूरा विद्युत भार एक ही केबल पर आ रहा है। साथ ही सभी केबलों को एक ही सर्किट से जोड़ा गया है। ऐसी स्थिति में किसी एक स्थान पर फॉल्ट आने पर पूरी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था बंद हो सकती है तथा विद्युत करंट फैलने से आमजन के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।
नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सालोडे ने कहा कि नवनिर्मित ओवरब्रिज की प्रकाश व्यवस्था को लेकर नगर पालिका द्वारा एमपीआरडीसी को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार ने अब तक आवश्यक सुधार नहीं किए। इसी कारण स्ट्रीट लाइटों का हैंडओवर नगर पालिका को नहीं मिल सका है।
वहीं नगर पालिका के सभापति ने बताया कि ओवरब्रिज निर्माण की डीपीआर में स्ट्रीट लाइट का प्रावधान किया गया था। इसे नगर पालिका को हैंडओवर करने के लिए संबंधित विभाग को पत्र भी भेजा गया था, लेकिन एमपीआरडीसी और निर्माण एजेंसी ने आवश्यक सुधार नहीं किए, जिसके कारण मामला अब तक लंबित है।

