बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदला जाना भारत के स्वतंत्रता संग्राम एवं स्वाधीनता संग्राम सेनानियों का अपमान : हाजी मोहम्मद हारून | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:


जमीअत उलमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने संबंधी कार्य परिषद के प्रस्ताव को अनुचित बताते हुए इसे भारत के स्वतंत्रता संग्राम तथा महान स्वाधीनता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली का अपमान करार दिया है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार करने की मांग की है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि महान शिक्षाविद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं क्रांतिकारी नेता मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली, भोपाल के गौरव और भारत के महान सपूत थे। उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए देश-विदेश में रहकर संघर्ष किया तथा स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान की। उनके प्रयासों ने न केवल भोपाल बल्कि पूरे भारत का नाम विश्व पटल पर स्थापित हुआ।

उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली हिंदू-मुस्लिम एकता के भी प्रतीक थे। भारत की आज़ादी के संघर्ष के दौरान अंग्रेजों के विरुद्ध स्थापित पहली निर्वासित (प्रोविजनल) सरकार में वे प्रधानमंत्री बने थे, जबकि राजा महेंद्र प्रताप उसके राष्ट्रपति थे।
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि विश्वभर में भोपाल की पहचान सबसे पहले मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली के नाम से हुई। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव न केवल अनुचित है, बल्कि भोपाल के गौरवशाली इतिहास और उसके महान सपूत का भी अपमान है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें अक्सर यह तर्क देती रही हैं कि कुछ नगरों एवं संस्थानों के नाम विदेशी आक्रांताओं से जुड़े होने के कारण बदले जा रहे हैं, लेकिन एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने का क्या औचित्य है, जिसने अपना संपूर्ण जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया?
उन्होंने कहा कि सामान्यतः विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के नाम महान व्यक्तित्वों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में रखे जाते हैं, लेकिन यह संभवतः पहला अवसर होगा जब किसी स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने की बात की जा रही है। इससे सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में वाग्देवी के सम्मान में कोई शैक्षणिक स्मारक स्थापित करना चाहती है, तो उसे एक नए विश्वविद्यालय की स्थापना करनी चाहिए और उसका नाम वाग्देवी के नाम पर रखा जाना चाहिए। इससे वाग्देवी का सम्मान भी होगा, प्रदेश को एक नया विश्वविद्यालय भी मिलेगा तथा हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की कि बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने संबंधी कार्य परिषद के प्रस्ताव को तत्काल अस्वीकार किया जाए। जमीअत उलमा मध्य प्रदेश इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है।

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