अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

हालांकि प्रदेश के करीब 12 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय को लंबे समय से राजस्थान कांग्रेस में किसी भी महत्वपूर्ण पद पर जगह नहीं मिल पाने से समुदाय के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेता प्रदेश में दो-दलीय व्यवस्था को देखते हुए मान रहे हैं कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव और नीतियों के चलते मुस्लिम मतदाता अंततः कांग्रेस के पक्ष में ही आएंगे।

दूसरी तरफ, दो महीने बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस से किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाने की मांग जयपुर से लेकर दिल्ली तक जोर पकड़ने लगी है।

राजस्थान से राज्यसभा की कुल 10 सीटों में से तीन सदस्य जून 2026 में रिटायर होने वाले हैं। इनमें कांग्रेस के नीरज डांगी और भाजपा के राजेंद्र गहलोत व रवनीत सिंह शामिल हैं। विधायकों की संख्या को देखते हुए दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है।
वर्तमान में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों में रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद कुमार शर्मा और सोनिया गांधी सभी बाहरी राज्यों से हैं, जबकि नीरज डांगी एकमात्र राजस्थान से हैं। उनके रिटायर होने के बाद कांग्रेस के सभी राज्यसभा सदस्य बाहरी राज्यों से हो जाएंगे। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान पर प्रदेश से एक नेता को राज्यसभा भेजने का दबाव बढ़ेगा।
राजस्थान से पहले भी भाजपा और कांग्रेस ने समय-समय पर मुस्लिम नेताओं को राज्यसभा भेजा है। भाजपा ने नजमा हेपतुल्ला को राज्यसभा भेजा था। वहीं कांग्रेस ने असरारुल हक, बरकतउल्ला खान, उस्मान आरिफ, अबरार अहमद, दुर्रु मियां और अश्क अली टांक जैसे नेताओं को राज्यसभा में भेजा। लेकिन लंबे समय से किसी मुस्लिम को राज्यसभा नहीं भेजा गया, जिसे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का परिणाम माना जा रहा है।
लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने कई बार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, लेकिन जीत कम ही मिली। झुंझुनूं से कैप्टन अय्यूब खान 1984 और 1991 में दो बार सांसद बने और केंद्र में मंत्री भी रहे।
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, जिनमें से केवल चार ही जीत सके—हाकम अली खान, जाकिर गैसावत, आमीन कागजी और रफीक खान।
वहीं भाजपा से जुड़े यूनुस खान को टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने डीडवाना से निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की, जो एक उल्लेखनीय घटना रही।
कुल मिलाकर, जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की एक सीट के लिए कई मुस्लिम नेता, पूर्व अधिकारी और विधायक दावेदारी कर रहे हैं। उम्मीदवार चयन में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद डोटासरा, टीकाराम जूली और दिल्ली स्तर पर प्रियंका गांधी व राहुल गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
दूसरी ओर, देशभर में मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग में कांग्रेस के प्रति नाराजगी भी बढ़ती दिख रही है, जिससे अन्य विकल्पों की ओर झुकाव बढ़ रहा है।

