जमशेद आलम, नई दिल्ली/भोपाल (मप्र), NIT:

सरकारी टेलीकॉम कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) ने अपने रिवाइवल के लिए Boston Consulting Group (BCG) को लगभग 34 महीनों (करीब 3 साल) के रोडमैप के लिए नियुक्त किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत BCG को लगभग ₹132 करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ₹132.16 करोड़) का भुगतान किया जा रहा है।
उद्देश्य:
इस पहल का मुख्य उद्देश्य BSNL की परिचालन लागत (OPEX) कम करना, राजस्व बढ़ाना, ग्राहक अनुभव सुधारना, नई तकनीकों को अपनाना तथा सेल्स और मार्केटिंग रणनीति को मजबूत करना है, ताकि कंपनी Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसे निजी ऑपरेटर्स से बेहतर मुकाबला कर सके।
दो चरणों में योजना:
यह योजना दो चरणों में लागू की जा रही है—
• पहले चरण में गैप एनालिसिस और समाधान तैयार करना
• दूसरे चरण में उन समाधानों का क्रियान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन)
सेवा गुणवत्ता पर फोकस:
पहले चरण में 11 सर्कल्स—केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश (पूर्व और पश्चिम), पश्चिम बंगाल, राजस्थान आदि—में सेवा गुणवत्ता (QoS) सुधारने पर जोर दिया गया है।
कर्मचारी संबंधित पहल:
BCG ने वर्कफोर्स रेशनलाइजेशन का सुझाव दिया है, जिसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के माध्यम से लागू करने की बात कही गई है, न कि जबरन छंटनी के जरिए।
अप
डेट्स (2024–2026):
• BCG ने नवंबर 2024 में अपनी अंतरिम रिपोर्ट “Project Uday” प्रस्तुत की।
• BSNL ने हाल के एक तिमाही में ₹262 करोड़ का लाभ दर्ज किया, जो करीब 17 वर्षों बाद पहली बार मुनाफे का संकेत माना जा रहा है।
• दूसरी VRS योजना के तहत लगभग 18,000–19,000 कर्मचारियों (करीब 35%) को रिटायर करने का प्रस्ताव सामने आया, हालांकि यूनियनों के विरोध के कारण यह अभी लंबित है।
विवाद और प्रतिक्रिया:
कर्मचारी संगठनों जैसे BSNL Employees Union ने इस कॉन्ट्रैक्ट को बेकार बताते हुए कहा कि पहले भी Deloitte और KPMG जैसी कंपनियों की सलाह से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
स्वदेशी बनाम विदेशी बहस:
BCG एक अमेरिकी कंपनी है, जिस कारण कुछ आलोचकों ने इसे “विदेशी हस्तक्षेप” बताया है। हालांकि सरकार का कहना है कि BCG केवल सलाहकार है और सभी अंतिम निर्णय BSNL व सरकार के हाथ में ही रहेंगे।
कुल मिलाकर:
यह पहल BSNL के 4G/5G रोलआउट, वित्तीय स्थिरता और प्रतिस्पर्धा में बने रहने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, कर्मचारी कटौती और लागत नियंत्रण जैसे मुद्दे अभी भी विवाद का विषय बने हुए हैं।

