शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT:

बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम के जीवन संघर्ष पर विचार गोष्ठी का आयोजन जिला रविदास महासभा के द्वारा किया गया। जिसमें मान्यवर कांशीराम के 92वें जयंती पर प्रमुख लोगों ने प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सुरेश प्रसाद जी ने किया एवं संचालन दयानंद भारती व सुरेंद्र भारती ने किया।अपने संबोधन में कहा कि मान्यवर कांशीराम साहब जी का जन्म 15 मार्च, 1934 को पंजाब के रोपड़ जिले के ख्वासपुर गांव में दलित (सिख समुदाय के रैदसिया) परिवार में जन्म हुआ वह अपने आठ भाई बहनों में सबसे बड़े थे। 9 अक्टूबर 2006 को 72 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में हार्ट अटैक से निधन हो गया। मान्यवर काशीराम भारतीय राजनीतिज्ञ एवं समाज सुधारक थे सामाजिक परिवर्तन में विश्वास रखते थे उनका मानना था कि सामाजिक न्याय सत्ता में बैठे व्यक्ति पर निर्भर करता है जब कोई बुरा नेता सत्ता में आता है तो फिर से अन्याय में बदल जाता है पिता हरि सिंह माता बिशन कौर जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि था एवं एक चमड़े का कारखाना भी था उनके चाचा सशस्त्र सेना में थे। उन्हों ने स्नातक रोपड़ राजकीय कालेज, पंजाब विश्वविद्यालय स्नातक किया डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ)1957 पुणे में नौकरी की शुरुआत की उसके बाद नौकरी के दौरान जातिगत भेदभाव से आहत होकर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और पेरियार के विचारों को गहनता से पढ़कर दलितों को एकजुट करने में जुटे पंजाब के एक चर्चित विधायक की बेटी का रिश्ता आया लेकिन दलित आंदोलन के हित में रिश्ते को ठुकरा दिया और बुद्धिस्ट रिसर्च सेंटर की स्थापना की.
कांशीराम जी की ऐतिहासिक किताब पहली बार ‘द चमचा युग’ (अंग्रेजी) 24 सितंबर 1982 को प्रकाशित हुई तथा,पे बैक टू सोसाइटी के सिद्धांत के तहत दलित कर्मचारियों को अपने वेतन का 20 वां हिस्सा समाज को लौटाने का आह्वान किया। बाबा साहेब द्वारा स्थापित रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सक्रिए सदस्य बनें.1971 में पूना में आरपीआई और कांग्रेस के बीच गैर बराबरी के समझौते और नेताओं के आपसी कलह से आहत होकर पार्टी से इस्तीफा दिया! बामसेफ 1971 से 6 दिसंबर 1978 को ‘बामसेफ’ का विधिवत गठन किया. कांशीराम का मानना था कि आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी नौकरी में पहुंचा वर्ग ही शोषितों का थिंक, इंटलैक्चुअल और कैपिटल बैंक कर्मचारी तबका है दलितों की राजनीतिक ताकत तैयार करने में बामसेफ काफी हद तक सफल रहा।
दलितों को एकजुट करने और राजनीतिक ताकत बनाने का अभियान 1970 के दशक में शुरू किया.
दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय को जोड़ने के लिए 6 दिसंबर 1981 को डीएस-4 का गठन किया डीएस-4 के जरिए सामाजिक, आर्थिक बराबरी का आंदोलन आम झुग्गी-झोपड़ी तक पहुंचाने में काफी मदद मिली. इसको सुचारु रूप से चलाने के लिए महिला और छात्र विंग में भी बांटा गया. जाति के आधार पर उत्पीड़न, गैर-बराबरी जैसे समाजिक मुद्दों पर लोगों के बीच जागरूकता और बुराइयों के खिलाफ आंदोलन किया डीएस-4 के जरिए ही देश भर में साइकिल रैली निकाली गई।और लोगों को जागरूक किया।इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी का गठन करके देश की दिशा बदल दिया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लाल बहादुर, विशिष्ट अतिथि ई. रामलगन गौतम भीष्म प्रसाद ,राज बहादुर सिंह गौतम कार्यक्रम में शामिल रहे। संतराज भारती, सुरेंद्र भारती,,सोमई बौद्ध, पूर्णमासी, राजकुमार, राजकुमार भारती, राजकुमार गौतम,राजन कुमार एडवोकेट, इन्द्रेश कुमार गौतम, अशोक कुमार, शैलेंद्र कुमार, गोपाल प्रसाद, विष्णु कांत, पशुपति नाथ रविकुल,देवेंद्र मणी, विरेन्द्र,अशोक कुमार,श्रीनारायण ,सुरेश कुमार भारती,
दिनेश कुमार, बलराम, पुष्कर, पचपेड़वा के पार्षद सतीश कुमार,विजय कुमार, सुरेश कुमार, रामानंद, गोविन्द,धीरज, बृजमोहन , दयानंद दयालू आदि लोग सम्मिलित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मीडिया प्रभारी राजकुमार ने किया और सभी का आभार प्रकट किया।

