देवरी विधानसभा से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, एससी-एसटी-ओबीसी व अल्पसंख्यक वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप | New India Times

त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

देवरी विधानसभा से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, एससी-एसटी-ओबीसी व अल्पसंख्यक वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप | New India Times

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विधानसभा देवरी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने एसडीएम के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

देवरी विधानसभा से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, एससी-एसटी-ओबीसी व अल्पसंख्यक वर्ग के साथ भेदभाव का आरोप | New India Times

ज्ञापन में अवगत कराया गया कि उच्च शिक्षण संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक सत्रों में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जिससे उन्हें अवसरों की समानता से वंचित होना पड़ रहा है। जाति आधारित व्यवस्था के चलते संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन हो रहा है और इन वर्गों को उच्च पदों पर आसीन होने से रोका जा रहा है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भारतीय संसद द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में मात्र 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया है, जबकि उच्च न्यायपालिका द्वारा 14 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण पर रोक लगाए जाने के कारण लाखों पिछड़ा वर्ग के छात्र एवं युवा रोजगार से वंचित हैं, जबकि पद रिक्त होने के बावजूद भर्तियां नहीं की जा रही हैं।

इसके विपरीत, मात्र 15 प्रतिशत आबादी वाले आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिस पर अब तक किसी प्रकार का न्यायिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों में गहरी निराशा व्याप्त है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यूजीसी बिल एससी, एसटी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया था, लेकिन सवर्ण समाज के दबाव में न्यायपालिका द्वारा जल्दबाजी में उस पर स्थगन आदेश जारी कर दिया गया।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि—

• यूजीसी बिल का शीघ्र क्रियान्वयन कराया जाए।

• अन्य पिछड़ा वर्ग को नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण का पूर्ण लाभ दिया जाए।

• एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के सदस्यों को क्रमोन्नति एवं पदोन्नति का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

• उच्च न्यायपालिका, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में समानता के सिद्धांत के अनुरूप एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक एवं आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को उनकी योग्यता के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए।

• उच्च जातियों द्वारा रचे जा रहे कथित षड्यंत्रों से वंचित वर्गों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापनदाताओं ने महामहिम राष्ट्रपति से अपील की कि वे दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समाज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए न्याय दिलाने हेतु भारत सरकार को आवश्यक निर्देश प्रदान करें। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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