मेहलक़ा इक़बाल अंसारी/मुकीत ख़ान, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
अल्लाह मुंबई के उन नि:स्वार्थ ख़िदमतगारों को बेहतरीन अज्र अता फरमाए, जो दिन-रात, चौबीसों घंटे अपने काम-धंधे और निजी व्यस्तताओं को किनारे रखकर सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह के मेहमानों यानी हाजियों की सेवा में पूरे तन, मन और धन से जुटे रहते हैं। ऐसे वालंटियर्स के जज़्बे को हज़ारों बार सलाम, जो बिना किसी स्वार्थ और दिखावे के इस मुबारक ख़िदमत को अंजाम दे रहे हैं।
मुंबई की अनेक तंजीमें वर्षों से हाजियों की सेवा हेतु समर्पित हैं। लोग अपनी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षमता अनुसार हर संभव सेवा दे रहे हैं। उनका केवल एक ही मक़सद होता है कि हज पर जाने वाले लोग हज के अरकान (अनुष्ठानों) को सही तरीके से समझें और कोई भी अहम अमल उनसे छूटने न पाए।
जैसे ही किसी का नाम हज के लिए चयनित होता है, उसी समय से विभिन्न स्थानों पर प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो हाजियों की रवानगी तक लगातार जारी रहता है। चाहे हज हाउस की मस्जिद हो या महाराष्ट्र हज कमेटी कार्यालय (साबू सिद्दीक मुसाफ़िरख़ाना) की मस्जिद, हर नमाज़ के बाद हज से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। एहराम बाँधने से लेकर तवाफ़, सई (सफा-मरवा) और शैतान को कंकरी मारने तक की प्रैक्टिकल मश्क कराई जाती है। महिलाओं के लिए अलग महिला प्रशिक्षकों की व्यवस्था भी की जाती है।
एयरपोर्ट के पी-9 में बनी मस्जिद में हाजियों के इस्तकबाल के साथ-साथ उन्हें ज़रूरी हिदायतें भी दी जाती हैं। चूँकि सेंट्रल हज कमेटी का मुख्यालय भी मुंबई में स्थित है, इसलिए यहाँ के अधिकारी और कर्मचारी भी ख़िदमतगारों के साथ बेहतरीन तालमेल से काम करते हैं। सभी मिलकर ऐसी शानदार व्यवस्था बनाते हैं कि हाजियों के लिए यह सफर सुकून, आसानी और इत्मीनान का ज़रिया बन जाता है।
सऊदी अरब पहुँचते ही व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से हाजियों की रहनुमाई शुरू हो जाती है। उनके हर छोटे-बड़े सवाल का आसान जवाब दिया जाता है। हज के दिनों में भी हर महत्वपूर्ण जानकारी, वीडियो और संदेशों के जरिए उन्हें हर क़दम पर मार्गदर्शन मिलता रहता है।
हालाँकि भारत के हर हज एम्बार्केशन पॉइंट पर इसी तरह सेवाएँ दी जाती हैं और हर जगह वालंटियर्स पूरे समर्पण के साथ लगे रहते हैं, लेकिन कई वर्षों से हमारा रिश्ता मुंबई महानगर से रहा है, इसलिए वर्ष 2000 से हम लगातार वहाँ की सेवाओं को करीब से देखते आए हैं। बीच के कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल से भी हाजियों की रवानगी होती रही, जहाँ वालंटियर्स पूरे उत्साह के साथ सेवाएँ प्रदान करते रहे। वहाँ की उड़ानें समाप्त होने के बाद हम मुंबई पहुँचते, वहाँ के सेवाभाव को देखते, उनसे सीखते और अपनी सामर्थ्य अनुसार सहयोग भी करते रहे।
मुंबई की सबसे ख़ास बात यह है कि यहाँ महिलाएँ भी हज हाउस से एयरपोर्ट तक लगातार सेवा और मार्गदर्शन में सक्रिय रहती हैं। हज हाउस मुंबई के ख़िदमतगारों का जज़्बा देखने लायक होता है। यही भावना वहाँ तैनात सुरक्षा कर्मियों में भी दिखाई देती है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के हाजी मुंबई से रवाना होते हैं, इसलिए यहाँ भारी भीड़ रहती है। लेकिन जैसे ही कोई हाजी हज हाउस में दाखिल होता है, सुरक्षा कर्मी भी उसके सामान को उठाकर लगेज काउंटर तक पहुँचाने में मदद करते हैं। इस तरह वे भी इस पुण्य कार्य में सहभागी बन जाते हैं।
हज हाउस से एयरपोर्ट जाने वाली बस के रवाना होने से पहले भी ख़िदमतगार हाजियों को ट्रेनिंग देते हैं और बस में बैठने के बाद रास्ते भर उन्हें हज के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते रहते हैं। दिन हो या रात, आख़िरी उड़ान रवाना होने तक यह सेवा निरंतर जारी रहती है।
मुंबई के इन ख़िदमतगारों के बारे में जो कुछ भी लिखा गया है, वह वास्तव में उनकी अमूल्य सेवाओं के मुक़ाबले में बहुत कम है। हज सेवा की ऐसी अनगिनत मिसालें हैं कि यदि सभी का उल्लेख किया जाए तो यह लेख बहुत लंबा हो जाएगा।
बहरहाल, बिना किसी दिखावे और प्रशंसा की चाह के, अल्लाह की रज़ा के लिए काम करने वाले मुंबई के इन सेवकों के लिए दिल से दुआ है कि अल्लाह तआला उनकी इस ख़िदमत को कबूल फरमाए, उन्हें इसका बेहतरीन बदला अता करे और उनकी आने वाली नस्लों को भी दीन के हर विभाग में हाजियों की सेवा का यह मुबारक सिलसिला जारी रखने की तौफ़ीक़ और हिदायत अता फरमाए।
आमीन सुम्मा आमीन।
(लेखक: आल इंडिया हज वेलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)

