रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

पुलिस शब्द अक्सर सख़्ती का एहसास कराता है, लेकिन झाबुआ ज़िले की पुलिस ने यह साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील और मानवीय दिल भी धड़कता है।
झारखंड से गुमशुदा एक अर्ध-मानसिक विक्षिप्त युवक को मध्यप्रदेश पुलिस ने न केवल सुरक्षित संरक्षण दिया, बल्कि तीन दिनों तक उसे अपने परिवार के सदस्य की तरह रखकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है।
तत्परता दिखाते हुए झारखंड पुलिस से किया संपर्क
जानकारी के अनुसार, रायपुरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत झकनावदा पुलिस चौकी में एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक भटकता हुआ मिला। पूछताछ में युवक ने स्वयं को झारखंड के एक गांव का निवासी बताया।
इसके बाद झाबुआ जिला पुलिस अधीक्षक श्री शिवदयाल गुर्जर के मार्गदर्शन में एसडीओपी पेटलावद अनुरक्ति सबनानी तथा रायपुरिया थाना प्रभारी गीता जाटव के निर्देशन में झकनावदा चौकी प्रभारी सुरेंद्र सिंह सिसोदिया ने तत्परता दिखाते हुए इंटरनेट माध्यम से झारखंड पुलिस से संपर्क किया।
झारखंड पुलिस से जानकारी मिली कि युवक बबलू कहार की गुमशुदगी वहां संबंधित थाने में दर्ज है। इसके बाद बबलू के परिजनों को सूचना दी गई।
14 माह से झारखंड से था लापता
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि युवक पिछले 14 महीनों से झारखंड से लापता था और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पहले से दर्ज थी।
पुलिस चौकी बनी घर, पुलिस बनी परिवार
परिजनों के झाबुआ पहुंचने तक पुलिस ने युवक को तीन दिन तक अपने संरक्षण में सुरक्षित रखा। उसे समय-समय पर भोजन, चाय-पानी दिया गया, नहलाया गया तथा ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े उपलब्ध कराए गए।
इस दौरान जीवदया संगठन के राष्ट्रीय सचिव मनीष कुमट द्वारा अर्ध-मानसिक विक्षिप्त युवक बबलू कहार को नए कपड़े भेंट किए गए, जिन्हें पहनाकर उसकी गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया। इतना ही नहीं, पुलिस ने उसे अपना मोबाइल फोन भी दिया, ताकि वह मनोरंजन के माध्यम से मानसिक रूप से सहज महसूस कर सके।
पूरी जिम्मेदारी के साथ संरक्षण
परिजनों से संपर्क होने पर उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें झारखंड से ट्रेन द्वारा झाबुआ पहुंचने में तीन दिन का समय लगेगा। इसके बाद पुलिस ने युवक को पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने संरक्षण में रखा।
भावुक मिलन
शुक्रवार रात्रि जब परिजन झकनावदा पुलिस चौकी पहुंचे, तो पुलिस ने युवक को सकुशल उनके सुपुर्द किया। भाई को सुरक्षित देखकर परिजनों की आंखें भर आईं और उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया।
इनका रहा विशेष योगदान
इस मानवीय कार्य में प्रधान आरक्षक अविनाश निषाद, प्रधान आरक्षक राजवीर सिंह जाट, आरक्षक राजू मुवेल, आरक्षक दीपक अलावा एवं आरक्षक बबलू पंचोली का विशेष सहयोग रहा।
समाज के लिए संदेश
झाबुआ पुलिस की यह पहल यह संदेश देती है कि कानून की रक्षा करने वाली वर्दी केवल अपराध से नहीं लड़ती, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर सहारा, संवेदना और मानवता का सबसे मज़बूत कंधा भी बनती है।
