उमेश द्विवेदी के संघर्ष को मिली सफलता, वित्तविहीन शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस इलाज | New India Times

शरीफ़ अहमद खान, ब्यूरो चीफ, सोनभद्र (यूपी), NIT:

उमेश द्विवेदी के संघर्ष को मिली सफलता, वित्तविहीन शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस इलाज | New India Times

माध्यमिक शिक्षक महासभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष एवं लखनऊ से शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी के सतत और लंबे संघर्ष का परिणाम अब साकार हो गया है। शिक्षक हित में उनके निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश के शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

गौरतलब है कि 5 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षकों को कैशलेस इलाज की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में दिनांक 29 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मंजूरी प्रदान की गई।

इस फैसले से प्रदेश के 11.92 लाख से अधिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें 4 लाख से अधिक वित्तविहीन शिक्षक भी शामिल हैं। इस योजना के क्रियान्वयन पर लगभग 358.61 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

विभागीय सूत्रों के अनुसार इस योजना को आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर लागू किया जाएगा और यह सुविधा पूरी तरह कैशलेस होगी।

वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रभारी एवं प्रदेश उपाध्यक्ष रितिका दुबे ने कहा कि संगठन के नेतृत्व के लंबे संघर्ष के बाद शिक्षकों को कैशलेस इलाज की यह दूरगामी उपलब्धि मिली है, जिससे शिक्षक परिवार में हर्ष का माहौल है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश अध्यक्ष उमेश द्विवेदी आगे भी वित्तविहीन शिक्षकों के हित में निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद शिक्षकों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशी का इजहार किया। प्रबंधक महासभा के जिलाध्यक्ष सुशील चौबे एवं राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज, रॉबर्ट्सगंज के प्रधानाचार्य डॉ. बृजेश सिंह ने इस फैसले पर प्रसन्नता जताते हुए शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी को बधाई दी।

प्रदेश उपाध्यक्ष उमाकांत मिश्र ने कहा कि कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए प्रदेश अध्यक्ष उमेश द्विवेदी के अलावा अब तक किसी भी संगठन अथवा विपक्षी राजनीतिक दल ने गंभीरता से पहल नहीं की थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही अन्य संगठन एवं विपक्षी दल इस उपलब्धि का श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पिछले पांच वर्षों में शिक्षक हित में किसी प्रकार का ठोस आंदोलन या धरना-प्रदर्शन नहीं किया गया।

अब शिक्षक समझ चुके हैं कि वित्तविहीन शिक्षकों के वास्तविक संघर्षशील नेता उमेश द्विवेदी ही हैं, जो उनके सुख-दुख में सदैव साथ खड़े रहते हैं।

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