गणतंत्र में समाजवाद - अभिव्यक्ति की आज़ादी : मतदाता सम्मान समारोह का आयोजन | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

गणतंत्र में समाजवाद - अभिव्यक्ति की आज़ादी : मतदाता सम्मान समारोह का आयोजन | New India Times

भारत को गणतंत्र राष्ट्र बने 77 साल हो चुके हैं। 1929 में पंडीत नेहरू ने कांग्रेस के मंच से संपूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा। 26 जनवरी 1930 से स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा। 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश राजा ने India Independence Act 1947 पर हस्ताक्षर कर उसे भारत में लागू किया। आज़ादी के बाद हिंदुस्तान United Kingdom of Great Britain Northern Ireland के अधीन था।

गणतंत्र में समाजवाद - अभिव्यक्ति की आज़ादी : मतदाता सम्मान समारोह का आयोजन | New India Times

1935 ब्रिटिश कानून से बनी प्रांतिक सरकारों के माध्यम से बनी संविधान सभा आजाद भारत की सरकार में तब्दील हुई। लोकतंत्र और राजतंत्र में फर्क है , अगर कोई देश लोकतांत्रिक (Democratic) है लेकिन गणराज्य (Republic) नहीं है तब वहां की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार राजतंत्र के तहत काम करेगी। लोकतंत्र यह शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है।

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गणतंत्र में प्रत्येक नागरिक सत्ता के केंद्र मे होता है। लोकतंत्र में सरकार को मिले प्रचंड बहुमत से चलाई जा रही व्यवस्था पर अंकुश रखने का काम गणतंत्र करता है। गणराज्य व्यवस्था में भारत के नागरिक आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार हासिल करते है। शहीद ए आजम भगत सिंह ने कहा था कि जब तक समाज में शोषण रहेगा तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

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भारत एक गणतंत्र राष्ट्र होने के कारण कोई भी सरकार संविधान के मूल ढांचे को बदल नही सकती है। धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद यह हमारे संविधान की आत्मा है। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद भारत संप्रभु गणतंत्र राष्ट्र बना। ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाया गया India Independence Act 1947 निरस्त किया गया।

BLO’s वोटर्स का सम्मान :
चुनाव आयोग के ऊपर वोट चोरी के साबित आरोपों के बीच प्रशासन की ओर से समूचे भारत मे राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया गया। जलगांव मे नानासाहब आगले , सतीश इंगले ने उत्कृष्ट बी एल ओ सुपरवाइजर , सीनियर सिटीजन दिव्यांग वोटर्स का प्रमाणपत्र दे कर सम्मान किया है।

By nit