बांकेगंज की गौशाला में लापरवाही का आरोप, भूख व इलाज के अभाव में गोवंशों की मौत | New India Times

वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

जनपद लखीमपुर खीरी के विकासखंड बांकेगंज स्थित ग्राम पंचायत ग्रांट नंबर 10 की गौशाला से बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां गोवंशों के लिए न तो समुचित चारे की व्यवस्था है और न ही समय पर चिकित्सकीय उपचार, जिसके चलते कई जानवर अत्यंत कमजोर व घायल अवस्था में तड़प-तड़पकर दम तोड़ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गौशाला में केवल चोकर डालकर औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि शासन द्वारा चारा, भूसा और दवाइयों के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

आरोप यह भी है कि सरकारी पशु चिकित्सक स्वयं मौके पर न पहुंचकर निजी झोलाछाप डॉक्टरों को भेज देते हैं, जिन्हें पशुओं के इलाज का समुचित ज्ञान नहीं होता। इसके बावजूद इलाज के नाम पर धन का बंदरबांट किया जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत ग्रांट नंबर 10 के सचिव योगेश वर्मा और गौशाला प्रबंधन समिति पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है। यदि गौशाला से जुड़े सभी रजिस्टरों और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

आरोप है कि जब इस मामले को लेकर अधिकारियों से शिकायत की जाती है तो वे टालमटोल करते हैं। बांकेगंज ब्लॉक के संबंधित अधिकारी, सचिव और खंड विकास अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि डबल इंजन सरकार के दावों के बावजूद गोवंश संरक्षण की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है।

बताया गया है कि विकासखंड क्षेत्र के बल्दीपुर मरघट के पास स्थित गोआश्रय स्थल में भी चारा और चिकित्सा के अभाव में गोवंश दम तोड़ रहे हैं, जिससे सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। जिले में बेसहारा गोवंशों के संरक्षण के लिए सैकड़ों गौशालाएं संचालित हैं, लेकिन कई जगह व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

गौशालाओं में प्रति माह लाखों रुपये चारा, भूसा, कर्मचारियों और चिकित्सा सुविधाओं पर खर्च दिखाया जाता है, मगर धरातल पर गोवंश भूख और बीमारी से मर रहे हैं। देखरेख के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई की जा रही है।

इस संबंध में जब एसडीएम गोला प्रतीक्षा त्रिपाठी से बात की गई तो उन्होंने मामले की जांच कर स्वयं गौशाला का निरीक्षण करने और खामियां मिलने पर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाता है।

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