मासूम उम्र, अद्भुत साहस: 5 वर्षीय चिराग सिंह राजावत शौर्य पुरस्कार के लिए प्रस्तावित | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मासूम उम्र, अद्भुत साहस: 5 वर्षीय चिराग सिंह राजावत शौर्य पुरस्कार के लिए प्रस्तावित | New India Times


साहस और सूझबूझ की मिसाल पेश करते हुए महज 5 वर्षीय बालक चिराग सिंह राजावत ने एक भीषण सड़क दुर्घटना में चार लोगों की जान बचाकर पूरे प्रदेश को गर्व से भर दिया है। इस अद्वितीय वीरता के लिए अब चिराग को शौर्य पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि उन्हें प्रधानमंत्री बालवीर पुरस्कार 2026 के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा नामित किया जा सके।

घटना 18 अक्टूबर 2025 की है, जब झाबुआ (मध्यप्रदेश) से राजस्थान के कोटा जाते समय दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कोटा से लगभग 8 किलोमीटर पहले नवनिर्मित सड़क असमतल होने के कारण कार अनियंत्रित होकर तीन से चार बार पलट गई। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि किसी भी बड़े व्यक्ति का हौसला टूट सकता था, लेकिन 5 वर्षीय चिराग ने विपरीत परिस्थितियों में असाधारण साहस का परिचय दिया।

मासूम उम्र, अद्भुत साहस: 5 वर्षीय चिराग सिंह राजावत शौर्य पुरस्कार के लिए प्रस्तावित | New India Times


पलटी हुई कार से चिराग खुद बाहर निकले और फिर बिना डरे अपनी 2 वर्षीय बहन रूबी राजावत को भी सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वह हाईवे पर पहुंचे और दोनों हाथ ऊपर उठाकर “हेल्प-हेल्प” कहते हुए ट्रक व अन्य वाहनों को रोका और मदद के लिए गुहार लगाई। इतना ही नहीं, मासूम चिराग ने दुर्घटनाग्रस्त कार को सीधा करवाने में भी मदद की और अपने माता-पिता को सुरक्षित बाहर निकलवाया।

चिराग ने मौके पर समझदारी दिखाते हुए पीछे से आने वाले वाहनों को भी समय रहते रोका, जिससे संभावित दूसरी दुर्घटनाओं को टाल दिया गया। इस प्रकार उसने अपने साहस, विवेक और सूझबूझ से खुद सहित चार लोगों की जान बचाई।

शासकीय सांदीपनि विद्यालय, मेघनगर विकासखंड में पदस्थ माध्यमिक शिक्षिका श्रीमती अनिता राज हाडा के सुपुत्र चिराग सिंह राजावत का यह साहसिक कार्य पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। अब जनप्रतिनिधियों और समाजजनों द्वारा मांग की जा रही है कि इस बालक को शौर्य पुरस्कार से सम्मानित कर प्रधानमंत्री बालवीर पुरस्कार 2026 हेतु नामित किया जाए।

मासूम उम्र में दिखाया गया यह अद्भुत साहस न केवल परिवार बल्कि पूरे झाबुआ जिले और मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

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