मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

कृषि को आधुनिक तकनीक, परंपरागत ज्ञान एवं प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाने तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी पहल पर वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस महाअभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
इसी क्रम में ज़िला बुरहानपुर में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद सत्र में बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने “कृषि रथ” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा प्रशासनिक अधिकारियों एवं प्रगतिशील किसानों से संवाद किया।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की आत्मा है। परंपरागत खेती पद्धतियाँ पर्यावरण के अनुकूल थीं और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती थीं। आज आवश्यकता है कि आधुनिक विज्ञान के साथ अपने पूर्वजों के ज्ञान और अनुभव को पुनः अपनाया जाए तथा रासायनिक खेती पर निर्भरता कम की जाए।
उन्होंने मिट्टी की गिरती उर्वरता और उससे जुड़े स्वास्थ्य संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अनियंत्रित एवं अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी में मौजूद जैविक कार्बन लगभग समाप्त हो रहा है, जिससे उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे निष्प्राण होती जा रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति ने वातावरण में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन निःशुल्क उपलब्ध कराई है, इसके बावजूद हम भारी लागत से रासायनिक नाइट्रोजन का उपयोग कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती ही वह सशक्त मार्ग है जिससे मिट्टी की जैविक संरचना पुनर्जीवित होती है और भूमि स्वयं वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अवशोषित करने में सक्षम बनती है।
श्रीमती चिटनिस ने हर्बीसाइड, वीडीसाइड एवं पेस्टीसाइड जैसे घातक रसायनों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ये न केवल मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने और किसानों को आत्मनिर्भर करने हेतु उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए।
इसी दिशा में जिले के किसानों को जागरूक करने एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए आगामी 15 दिनों का विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत प्रशासनिक एवं कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव और खेत-खेत जाकर किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराएंगी तथा प्राकृतिक खेती की सरल तकनीकों का प्रशिक्षण देंगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। अंत में किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने एवं जल संरक्षण के लिए संकल्प लिया। कार्यक्रम ने “किसान सशक्त—प्रदेश समृद्ध” के संदेश के साथ किसान कल्याण वर्ष 2026 की सशक्त शुरुआत की।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य किशोर पाटिल, दिलीप बेलदार, किशोर शाह, देवानंद पाटिल, विनोद कोली, कृषि विभाग के उपसंचालक मनोहर देवके, आशीष शुक्ला एवं आकाश चौधरी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

