नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र नगर परिषद नगर पंचायत महानगर पालिका चुनाव में None Of The Above (NOTA) के रहते मेयर्स और नगर सेवकों का निर्विरोध चुनाव करवा चुकी बीजेपी को राजपाठ चलाने की जल्दी हो गई है। 286 नगर परिषद नगर पंचायतों में बीजेपी संग शिवसेना एकनाथ शिंदे स्वीकृत सदस्य मनोनन की प्रक्रिया को अंजाम देने की प्रक्रिया शुरू कर चुके है। मुंबई हाई कोर्ट में निर्विरोध चुनाव को चुनौती देने वाली दर्ज़नो याचिकाएं दायर है। सुप्रीम कोर्ट के 2013 और 2025 के आदेश के अनुसार NOTA को काल्पनिक उम्मीदवार माना गया है।

NOTA के रहते त्रिस्तरीय राजकीय चुनाव प्रणाली में कोई भी चुनाव निर्विरोध नहीं हो सकता है। संविधान के अनुसार शीर्ष अदालत के फैसले संवैधानिक संस्थाओं के ऊपर बाध्य माने जाते हैं। चुनाव आयोग पर निर्भर करता है कि वो इन फैसलों को अमल में लाता है या फ़िर इन फैसलों को टालने के लिए NOTA से संबंधित अपने हि बनाए नियमों को ठीक उसी प्रकार से बदल देता है जैसे विपक्ष द्वारा CCTV फुटेज मांगे जाने पर नियमों को बदल दिया गया था।

2014-19 के दौरान देवेन्द्र फडणवीस सरकार की साजिशन भूमिका के कारण महाराष्ट्र में 8 साल से निकायो के आम चुनाव नही हो पाए है। नगर परिषद नगर पंचायत में 10 सदस्यो के पीछे संख्याबल से मजबूत पार्टी के एक कार्यकर्ता को स्वीकृत नगरसेवक की कुर्सी पर बिठाया जाना है।
राज्यसभा विधान परिषद पर चुनकर जाने वाले विपक्ष के नेताओ पर फब्तियां कसने वाले बीजेपी के दोगले नेता स्वीकृत नगर सेवकों के सहारे पिछले दरवाजे से निकायो की सत्ता पर कब्जा चाहते है। जलगांव मनपा में महायुति में भीतरघात की खबरे सुनाई दे रही है। जलगांव में शिवसेना UBT और एन सी पी शरदचंद्र पवार जामनेर की तरह अंडर करंट के भरोसे है। 75 सीटों पर 7 स्वीकृत सदस्य चुने जाने है।
