गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:
उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक दौर में सपा के कद्दावर नेता व तत्कालीन मंत्री आज़म खां की चोरी हुई भैंसों को खोजने के लिए सर्च अभियान चलाने वाली पुलिस, वहीं भाजपा सांसद और अधिकारियों के पालतू कुत्ते-बकरी ढूंढने में दिन-रात एक कर देने वाली यूपी पुलिस आज एक छात्र को खोजने में नाकाम साबित हो रही है।
आगरा से भाजपा सांसद व पूर्व राज्यमंत्री राम शंकर कठेरिया का पालतू कुत्ता लापता होने पर जिस तरह पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुर्खियां बटोरी थीं, वह आज भी लोगों को याद है। कभी मंत्री की भैंस, कभी बकरी और कभी कुत्ते की तलाश में मुस्तैद रहने वाली पुलिस से अब सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर आम नागरिकों के मामलों में यह सक्रियता क्यों गायब हो जाती है।
आलापुर क्षेत्र से 21 नवंबर 2025 से लापता छात्र हिमांशु उर्फ अमन को लेकर परिजन गहरे सदमे और आक्रोश में हैं। परिजनों का आरोप है कि बीते लगभग दो महीनों से वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं, धरने पर बैठे हैं, लेकिन अंबेडकर नगर पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। अब तक न तो कोई ठोस सुराग मिला है और न ही पुलिस की ओर से संतोषजनक कार्रवाई दिखाई दे रही है।
परिवार का साफ सवाल है
“जब पुलिस प्रदेश के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और सांसदों की भैंस, बकरी और कुत्ते ढूंढ सकती है, तो एक छात्र हिमांशु को क्यों नहीं?”
यह मामला अब सिर्फ एक लापता छात्र का नहीं, बल्कि यूपी पुलिस की प्राथमिकताओं और आम जनता के प्रति उसकी संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही एक गंभीर जनआंदोलन का रूप ले सकती है।

