दलित राजनीति में बड़ा उलटफेर: भीमसेना प्रमुख सतपाल तंवर जनवरी में करेंगे नई पार्टी का ऐलान, यूपी बनेगा मुख्य टारगेट | New India Times

फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

दलित आंदोलन के पुराने दिग्गज और भीम सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर जल्द ही राजनीति के दंगल में उतरने वाले हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि तंवर जनवरी 2026 में अपनी नई राजनीतिक पार्टी का औपचारिक ऐलान करेंगे। इस नई पार्टी का कोडनेम “स.स.पा.” या “SSP” सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसकी फुल फॉर्म को लेकर जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है।

देश की निगाहें इस समय नवाब सतपाल तंवर पर टिकी हुई हैं। भीम सेना चीफ के रूप में दलित आंदोलनों में सक्रिय तंवर का यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा खेल बिगाड़ सकता है। यूपी को मुख्य टारगेट बनाते हुए तंवर की नई पार्टी 2026 के पंचायत चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।

बसपा में खलबली, छोटे दल परेशान

इस खबर से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में खलबली मच गई है। बसपा के लिए यूपी में पहले से ही मुश्किलें बढ़ी हुई हैं, और तंवर की एंट्री से दलित वोट बैंक में और विभाजन की आशंका है। छोटे दलित दलों के नेता भी परेशान हैं, क्योंकि तंवर की लोकप्रियता और भीम सेना का जमीनी नेटवर्क किसी भी दलित पार्टी के बहुमत की राह में रोड़ा बन सकता है। सतपाल को कम आंकना किसी भी दल के लिए भारी पड़ सकता है।

“स.स.पा.” का सस्पेंस कब दूर होगा? चर्चाओं का बाजार गर्म

सोशल मीडिया पर “स.स.पा.” या “SSP” का नाम गुप्त रखा गया है, लेकिन यह तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। पूरा नाम क्या होगा? इस पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस सस्पेंस के दूर होने का इंतजार पूरे देश को है। इंटरनेट पर यह नया राजनीतिक दल ट्रेंड कर रहा है, और दलित युवाओं में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

भाजपा से जंग का ऐलान?

सूत्र बताते हैं कि तंवर की नई पार्टी भाजपा के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर सकती है। दलितों के शोषण को बहाना बनाते हुए यूपी चुनावों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है। राजनीति के दंगल में भीम सेना मुखिया की एंट्री से बड़े दलों के होश उड़ गए हैं।

क्या जनवरी में होगा ऐलान-ए-जंग?

जनवरी 2026 में पार्टी ऐलान के साथ ही तंवर यूपी में बड़ी रैलियां, यात्राएं और कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। इससे दलित वोटों का ध्रुवीकरण तेज होगा, और 2027 के विधानसभा चुनावों की तस्वीर पहले से ही बदलनी शुरू हो जाएगी।

नवाब सतपाल तंवर का यह कदम दलित राजनीति में नया अध्याय लिख सकता है। देखना यह होगा कि “स.स.पा.” का पूरा नाम क्या होता है और यह यूपी की सियासत को कितना प्रभावित करता है।

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