जमशेद आलम, भोपाल/इंदौर (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों और बड़े स्वास्थ्य संकट को गंभीर लापरवाही मानते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट @DrMohanYadav51 से गुरुवार (2 जनवरी 2026) को इसकी जानकारी साझा की गई।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटाने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
क्या है पूरा मामला
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के अंत से दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया। जानकारी के अनुसार, मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज हुआ था।
इसी पाइपलाइन के ऊपर पुलिस चौकी के पास बना सार्वजनिक शौचालय, सीवेज के पानी का स्रोत बना।
लीकेज के जरिए गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल गया।
मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी के नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म, ई.कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए, वहीं कुछ सैंपलों में हैजा (विब्रियो कोलेरी) के बैक्टीरिया की भी आशंका जताई गई है। स्थानीय लोगों ने कई दिनों पहले पानी से बदबू आने की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
प्रभाव और आंकड़े
प्रभावित लोग: 1300 से 2800 से अधिक
लक्षण: उल्टी, दस्त, डायरिया, बुखार
अस्पताल में भर्ती: लगभग 200–270 मरीज, जिनमें 30 से अधिक ICU में
मौतों को लेकर विरोधाभास:
स्वास्थ्य विभाग: 4 मौतें
इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव: 10 मौतें
स्थानीय सूत्र/रिपोर्ट्स: 13–15 मौतें
मृतकों में 5–6 महीने का मासूम बच्चा अव्यान साहू भी शामिल है, जिसकी मां ने दूषित पानी को दूध में मिलाकर पिलाया था।
सरकार की कार्रवाई
मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख मुआवजा
सभी मरीजों का मुफ्त इलाज (सरकारी व निजी अस्पतालों में)
प्रभावित क्षेत्र में टैंकरों से स्वच्छ पानी की आपूर्ति
40,000 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच
प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी लापरवाही स्वीकार करते हुए नई पाइपलाइन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
अन्य प्रतिक्रियाएं
हाई कोर्ट ने जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने नोटिस जारी किया है।
कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन कर जवाबदेही तय करने की मांग की।
भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी इस घटना को गंभीर प्रशासनिक चूक बताया।
सोशल मीडिया पर जनता में भारी आक्रोश है और मौतों के सही आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।
इंदौर को लगातार आठ वर्षों तक देश का सबसे स्वच्छ शहर चुने जाने के बावजूद यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन मौतों के आंकड़ों पर विवाद अभी भी जारी है।

