अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड के मुख्यालय की यह तस्वीर भवन की वर्तमान स्थिति को बयां करती है कि राज्य में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाला यह कार्यालय आज स्वयं जर्जर हालत में नजर आ रहा है।
तस्वीर में साफ दिखाई देता है कि भवन की बाहरी दीवारों पर जगह-जगह सीलन, पपड़ी और रंग उखड़ने के निशान हैं। प्रवेश द्वार के ऊपर लगा साइनबोर्ड भी पुराना और धुंधला हो चुका है, जिससे कार्यालय की पहचान तक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। परिसर में लगी रेलिंग और पिलर भी समय के साथ क्षतिग्रस्त होते प्रतीत हो रहे हैं।जब मदरसा बोर्ड का मुख्य कार्यालय ही बदहाल है, तो प्रदेश भर में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह हालात बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए चिंता का विषय है।

स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह कार्यालय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था का प्रतीक भी है। ऐसे में भवन की यह स्थिति सरकारी लापरवाही की ओर इशारा करती है। उनका मानना है कि यदि मुख्यालय का ही रखरखाव ठीक नहीं होगा, तो जमीनी स्तर पर मदरसों की स्थिति सुधारने की उम्मीद करना मुश्किल है।
शिक्षा से जुड़े संगठनों ने सरकार से मांग की है कि मदरसा बोर्ड के मुख्यालय का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि यह संस्थान अपनी गरिमा और जिम्मेदारी के अनुरूप दिखाई दे सके।
यह तस्वीर एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़ी संस्थाओं को वास्तव में वह महत्व और सुविधाएं मिल पा रही हैं, जिनकी वे हकदार हैं।
