आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) का ज़ोरदार प्रदर्शन, जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन | New India Times

अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) का ज़ोरदार प्रदर्शन, जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन | New India Times

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन, संबद्ध ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के आह्वान पर आशा एवं आशा संगिनियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के चौथे दिन प्रयागराज में विशाल जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी, वहीं 23 दिसंबर को प्रदेशभर की आशा कर्मी विधानसभा का घेराव करेंगी।

आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) का ज़ोरदार प्रदर्शन, जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन | New India Times

प्रदेश में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल से बचने के लिए सरकार द्वारा वार्ता बुलाकर समस्याओं का समाधान करने के बजाय भय का माहौल बनाकर आंदोलन को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों को नाकाम करते हुए प्रयागराज जनपद में आशा संगिनियों ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए बालसन चौराहे से जिला मुख्यालय तक जोरदार प्रदर्शन किया।

आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) का ज़ोरदार प्रदर्शन, जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन | New India Times

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऐक्टू प्रदेश सचिव कॉमरेड अनिल वर्मा ने कहा कि जिले की अधिकांश आशा और संगिनियों ने हड़ताल में भाग लिया है और विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किए गए।

उन्होंने कहा कि एक माह पूर्व ही सरकार को हड़ताल का नोटिस दे दिया गया था। यदि सरकार समय रहते वार्ता कर समस्याओं का समाधान करती, तो हड़ताल जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

कार्यक्रमों के प्रभावित होने की जिम्मेदारी आशा कर्मियों की नहीं, बल्कि सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की है। यह सरकार के महिला एवं श्रमिक विरोधी चरित्र को उजागर करता है।

मंडल अध्यक्ष रेखा मौर्य ने कहा कि सरकार और नौकरशाही गुलामी और बेगार के माध्यम से श्रम का शोषण कर रही हैं। 70 कार्यों के बदले 70 रुपये प्रतिदिन भी न देने वाली सरकार के पास दमन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आशा कर्मी अब बेगार और भूखे पेट काम नहीं करेंगी।

आशा वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव मंजू ने कहा कि 1.5 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन राशि घोटाले की वर्षों से उठ रही मांग को अनसुना कर सरकार का भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दावा खोखला साबित हो गया है। वर्षों से लाखों रुपये का पारिश्रमिक बकाया है, जिसे सरकार देने को तैयार नहीं है।

कोविड काल की केंद्रीय अनुतोष राशि, राज्य वित्त के 28 माह का भुगतान, आभा, आयुष्मान कार्ड, गोल्डन कार्ड सहित पोलियो, फाइलेरिया, कुष्ठ रोग, संचारी रोग, दस्तक जैसे अभियानों का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए ऐक्टू जिला सचिव कॉमरेड देवानंद ने कहा कि वर्ष 2013 में भारतीय श्रम सम्मेलन में आशा कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा, न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी और मातृत्व अवकाश देने की सिफारिशें की गई थीं, जो आज तक लागू नहीं की गईं। इन मांगों को पूरा किए बिना किसी भी सरकार द्वारा दमन के माध्यम से आंदोलन को रोका नहीं जा सकता।

प्रदर्शन को भाकपा (माले) जिला प्रभारी कॉमरेड सुनील मौर्य, आरवाईए प्रदेश उपाध्यक्ष राधा, मीडिया प्रभारी सुभाष कुशवाहा, कल्पना पटेल सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया। हड़ताल में सभी ब्लॉकों की आशा वर्कर्स शामिल रहीं। यूनियन ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।

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