कर्ज पर कर्ज ले रही है सरकार, मध्य प्रदेश पर 1 लाख 57 हजार करोड़ का कर्ज, खर्च को लेकर श्वेत पत्र जारी करें शिवराज: कमलनाथ | New India Times

 पीयूष मिश्रा/अश्वनी मिश्रा, सिवनी/भोपाल, NIT;​कर्ज पर कर्ज ले रही है सरकार, मध्य प्रदेश पर 1 लाख 57 हजार करोड़ का कर्ज, खर्च को लेकर श्वेत पत्र जारी करें शिवराज: कमलनाथ | New India Timesकर्ज में डूबी मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर रिजर्व बैंक से दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। यह कर्ज दस साल के लिए लिया गया है। इसको लेकर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज पर निशाना साधा है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्वेत पत्र जारी करने की बात कहीं है। उन्होंने खत में लिखा है कि प्रदेश क़र्ज़ के बोझ तले डूबता जा रहा है और सरकार फिर से दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है।इसी कर्ज को लेकर कमलनाथ ने शिवराज सरकार से कई सवाल भी किए है, जिनका जवाब मांगा है। बता दे कि कमलनाथ प्रदेश की जनता औऱ किसानों को लेकर पहले भी शिवराज को कई बार खत लिख चुके है।

कमलनाथ का खत 
पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद कमलनाथ ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लगातार लिये जा रहे क़र्ज़ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिवराज सरकार प्रदेश को क़र्ज़ में डुबाती जा रही है। प्रदेश के प्रति व्यक्ति पर औसत क़र्ज़ की राशि बढ़ती जा रही है। बढ़ते क़र्ज़ से प्रदेश का हर नागरिक चिंतित है। इस वित्तीय वर्ष में 11 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ ले चुकी शिवराज सरकार , फिर 2 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ लेने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने आगे लिखा है कि पूर्व से ही प्रदेश पर 1 लाख 57 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ है। ऐसे में निरंतर लिये जा रहे क़र्ज़ से प्रदेश का नागरिक चिंतित है।चुनावी वर्ष में शिवराज चुनाव जीतने के लिये दिन -प्रतिदिन घोषणाएँ कर रहे है और उन घोषणाओं के लिये निरंतर क़र्ज़ ले रहे है और जनता पर नित -नये टैक्स का बोझ भी लादा जा रहा है। 
उन्होंने कहा है कि लगता है शिवराज सरकार प्रदेश को सर्वाधिक क़र्ज़दार प्रदेश के मामले में भी देश में अव्वल लाने में लगी है ? शिवराज की ब्रांडिंग , प्रचार -प्रसार , यात्राओं , अभियानो में सरकार करोड़ों रुपया चुनावी वर्ष में लूटा रही है।इसलिये सरकार क़र्ज़ की वर्तमान स्थिति व उसके कारण पर शीघ्र श्वेत पत्र जारी करे।
• वर्ष 2003 में भाजपा सरकार के आने के पूर्व प्रदेश पर कुल कितना क़र्ज़ था और अभी वर्तमान में कितना ?
• अभी तक लिये गये क़र्ज़ की राशि का कहाँ व किस कार्य के लिये उपयोग किया गया ?
• कितनी ब्याज कुल क़र्ज़ राशि पर दी जा रही है ?
• प्रदेश के प्रति व्यक्ति पर औसतन कितना क़र्ज़ है ?
• सरकार ने बढ़ते क़र्ज़ को देखते हुए , फ़िज़ूलख़र्ची रोकने सहित अन्य क्या क़दम उठाये है ?
शिवराज सरकार इन सब सवालों के जवाब को श्वेत पत्र में शामिल कर , शीघ्र ही क़र्ज़ को लेकर श्वेत पत्र जारी करे।

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