धुलिया पुलिस ने लाखों की चोरी का किया पर्दाफाश — श्रीराम पवार की पूछताछ में आरोपी ने कबूला जुर्म, नकदी व मोबाइल बरामद | New India Times

अब्दुल वाहिद काकर, ब्यूरो चीफ, धुले (महाराष्ट्र), NIT:

लाखों की घरफोड़ चोरी के इस चर्चित मामले का धुलिया पुलिस ने सिर्फ आठ दिनों में पर्दाफाश कर दिया। थाना प्रभारी निरीक्षक श्रीराम पवार की तेज, सटीक और अनुभवसिद्ध पुलिसिंग ने एक बार फिर साबित किया कि धुलिया में चोरी करना, खुद को पुलिस के हवाले करने जैसा ही है। जिस गति और रणनीति से इस चोरी का खुलासा हुआ, उसने पुलिस टीम की कार्यकुशलता पर एक और भरोसे की मोहर लगा दी है।

घटना :

14 नवंबर 2025 की रात 02:30 से 05:30 बजे के बीच सुयोगनगर, वाडीभोकर रोड स्थित प्लॉट नंबर 13 पर रहने वाले राधेश्याम सोनगीरे के घर से अज्ञात चोर 4 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गया। 21 नवंबर को पश्चिम देवपूर थाने में यह मामला धारा 379/2025 के तहत दर्ज किया गया। इसके साथ ही जांच की रफ्तार तेज हो गई।

जाँच में मिली अहम सफलता :

अंगुली-मुद्रा (फिंगरप्रिंट) और तकनीकी जांच ने पुलिस को सीधे एक पुराने और पुनः सक्रिय हुए अपराधी तक पहुंचाया। आरोपी की पहचान दत्तू अशोक ठाकरे (35) निवासी अनवर्द खुर्द, तहसील चोपड़ा, जिला जलगांव के रूप में हुई। यह कोई नया अपराधी नहीं था—इससे पहले भी धुलिया शहर थाने में अपराध क्रमांक 67/2023 में धारा 354, 354(क) व पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी रह चुका है।

आरोपी की गिरफ्तारी :

23 नवंबर को पवार की टीम पुख्ता रणनीति पर काम कर रही थी। रिया पेट्रोल पंप के पीछे पांझरा नदी किनारे से आरोपी को हिरासत में लिया गया। शुरुआती पूछताछ में वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन पवार की पैनी नजर और अनुभव ने आरोपी की चालाकी को बेनकाब कर दिया। अंततः आरोपी टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

बरामदगी :

₹1,87,000 नकद (500 के 374 नोट)

₹7,500 का Realme स्मार्टफोन

एक प्लास्टिक कैरी बैग

बालाजी बैग सेंटर का विजिटिंग कार्ड

ऑपरेशन में शामिल अधिकारी:

इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक श्रीकांत धिवरे तथा अपर पुलिस अधीक्षक अजय देवरे का मार्गदर्शन अहम रहा। वहीं पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे स्थानिक अपराध शाखा निरीक्षक श्रीराम पवार, जिनकी “ह्यूमन साइकोलॉजी रीडिंग” क्षमता ने आरोपी की चुप्पी तोड़ी।

टीम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारी व कर्मचारी:

अंगुली-मुद्रा विशेषज्ञ सहायक पुलिस निरीक्षक विनोद खरात,
पीएसआई अमित माली, धनंजय मोरे, संजय पाटिल,
अमलदार मच्छिद्र पाटिल, हेमंत बोरसे, संतोष हिरे,
योगेश चव्हाण, प्रल्हाद वाघ, ईश्वर सोनवणे, और प्रकाश भावसार।

आखिरकार, यह पूरा मामला पुलिस की संयुक्त मेहनत, तकनीकी कौशल और पवार की प्रभावी पूछताछ का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गया।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.