ओमप्रकाश सोनी, अनूपपुर, (मप्र), NIT:

रेत चोरी के मामले में प्रशासन की अनदेखी से लोग परेशान हैं। कटकोना, जमुड़ी, लहसुई, इमली और बमूर घाटों से रेत की चोरी हो रही है, लेकिन खनिज प्रशासन, पुलिस प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
यह स्थिति प्रशासन का दोहरा मापदंड दर्शाती है, जहाँ गरीबों पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन बड़े अपराधियों को बख्श दिया जाता है। रेत के अवैध उत्खनन से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रेत चोरी से नदियों का जलस्तर कम होता है और उनके किनारों पर कटाव की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है।
सामाजिक प्रभाव:
रेत चोरी से स्थानीय लोगों के बीच तनाव और संघर्ष को भी ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहाँ ट्रैक्टर मालिकों द्वारा ग्रामीणों के लिए रेत गिराने को लेकर विवाद करते देखा जाता है।
अगर जिम्मेदार विभागों द्वारा सही तरीके से इन माफियाओं पर नकेल कसी जाए, तो रेत की चोरी रुक सकती है। क्योंकि यह काम बड़े स्तर पर आदतन रेत माफियाओं द्वारा ही किया जाता है, जो चिन्हित होते हैं और जिन्हें आसानी से पकड़ा भी जा सकता है।
ट्रैक्टरों और डागियों (स्थानीय वाहन) की संख्या भी इतनी नहीं है कि इन्हें पकड़ने में दिक्कत हो। ग्राम वासियों ने बताया कि कटकोना घाट से तो प्रतिदिन एक चिन्हित डागी और ट्रैक्टर ही रेत का परिवहन करते देखे जाते हैं, लेकिन रामनगर एवं बिजुरी थाना अंतर्गत आज तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है।
