रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी म.सा. की पुण्यतिथि के अवसर पर तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी आदि ठाणा के पावन सानिध्य में चतुर्विध संघ द्वारा सामूहिक एकासन एवं विविध तप-आराधनाओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।
जैन धर्म में चारित्रिक महापुरुषों की पुण्यतिथि रत्नत्रय की आराधना एवं तप-साधना के साथ मनाने की परंपरा रही है। इसी क्रम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 160 आराधकों ने सामूहिक एकासन तप किया। वहीं 88 वर्षीतप आराधक, 32 नन्दीचक्र आराधक, 4 श्रेणीतप आराधक सहित 15 से 20 अन्य तपस्वियों की दीर्घ तपस्या से वातावरण तपमय बना रहा। इस अवसर पर सामूहिक तीन-तीन सामायिक एवं सात सामायिक की विशेष आराधना भी संपन्न हुई।
जीवन में अनेक संघर्ष आए, लेकिन सौभाग्य कभी साथ नहीं छोड़ा
गुणानुवाद सभा को संबोधित करते हुए तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी ने कहा कि सरवानिया निवासी चौथमलजी फाफरिया के परिवार में जन्मे मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमलजी के जीवन में अनेक संघर्ष और उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनका सौभाग्य सदैव उनके साथ रहा।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्म और भाग्य दोनों पर विश्वास रखना चाहिए, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह गलत कर्म करता रहे। गलत क्रियाओं का परिणाम सदैव बुरा ही होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जेल से छूटने के बाद व्यक्ति संकल्प करता है कि अब कभी गलत कार्य नहीं करेगा, लेकिन मोह और आसक्ति के कारण वह पुनः उसी मार्ग पर लौट सकता है।
तत्वज्ञश्री ने कहा कि मालव केसरीजी ने बाल्यकाल में दीक्षा ग्रहण की और समाज में व्याप्त मृत्यु भोज, बाल विवाह, वृद्ध विवाह, जातिवाद एवं छुआछूत जैसी अनेक सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ प्रभावी कार्य किया। उन्होंने समाज सुधार की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया।
मीठा बोलने में कुछ नहीं लगता
अपने सहज एवं व्यंग्यपूर्ण अंदाज में धर्मेन्द्रमुनिजी ने कहा कि व्यक्ति प्रतिदिन मिठाई खाता है, फिर भी उसकी वाणी मधुर नहीं होती, जबकि मीठा बोलने में कुछ भी खर्च नहीं होता। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार में मधुरता और सद्भाव बनाए रखना चाहिए।
भाग्य हो तो छत्रपति, नहीं तो पत्रपति बनने में देर नहीं लगती
रोचक वक्ता पूज्य श्री संदीपमुनिजी ने कहा कि माता-पिता अपनी संतान के लिए धन-संपत्ति जुटा सकते हैं, लेकिन यदि संस्कार और पुण्य का अभाव हो तो वैभव भी लंबे समय तक टिक नहीं पाता। बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाएं तो उनके जीवन के रास्ते स्वयं आसान होते जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भाग्य साथ हो तो व्यक्ति छत्रपति बन जाता है, अन्यथा पत्रपति बनने में भी देर नहीं लगती। धर्म क्षेत्र में महान बनने के लिए पुण्य के साथ पुरुषार्थ भी आवश्यक है।
50 से अधिक आराधकों को 9 अगस्त को मिलेगी सामूहिक वाचनी
संघ प्रवक्ता पवन नाहर एवं सचिव हितेश शाह ने बताया कि पूज्य श्री धर्मदास युवा संगठन के प्रयासों से प्रतिक्रमण सूत्र को छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर सहज रूप से कंठस्थ कराया जा रहा है। थांदला में 50 से अधिक बच्चों, युवाओं एवं वरिष्ठ आराधकों ने प्रतिक्रमण कंठस्थ कर लिया है। इन्हें 9 अगस्त, रविवार को धर्मसभा में तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी द्वारा सामूहिक वाचनी प्रदान की जाएगी।
संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन रतलाम, झाबुआ, पेटलावद, कल्याणपुरा, बामनिया, करवड़ सहित अनेक स्थानों से श्रद्धालु दर्शन एवं वंदन के लिए थांदला पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं के आवास एवं आतिथ्य की समुचित व्यवस्था महावीर भवन में श्रीसंघ द्वारा की जा रही है।

